ऋषिकेश एम्स में 2.73 करोड़ रुपये का सीसीयू घोटाला: सीबीआई ने पूर्व निदेशक पर एफआईआर दर्ज की, जांच में उपकरण गायब और फाइलें लापता पाईं गईं

ऋषिकेश। उत्तराखंड के एम्स ऋषिकेश में कार्डियो विभाग के सीसीयू निर्माण में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं हैं, और अब इस मामले में ताज़ा जांच के बाद सीबीआई ने पूर्व निदेशक डॉ. रविकांत और दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है। जांच के दौरान यह सामने आया है कि जिस सीसीयू (Coronary Care Unit) के लिए लगभग 8.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, वह कभी पूरी तरह कार्यात्मक नहीं हुआ। मार्च 2025 में एक औचक निरीक्षण में टीम ने देखा कि निर्माण कार्य अधूरा है, दीवारों और छत का काम अधूरा है, फर्श टूटा हुआ है, कई महंगे उपकरणों की अनुपस्थिति है और दर्ज सामान स्टोर में मौजूद नहीं है। विशेष रूप से, जीवनरक्षक उपकरण डिफिब्रिलेटर की खरीद पर लगभग 13.30 लाख रुपये खर्च किए गए बताए गए हैं, लेकिन वह उपकरण कभी सीसीयू में नहीं पहुंचा। इसके अलावा अन्य उपकरण जैसे ऑटोमैटिक स्लाइडिंग डोर, मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम, एयर प्यूरीफायर आदि भी गायब पाए गए हैं। अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण कार्य संतोषजनक होने का प्रमाणपत्र एडिशनल प्रोफेसर डॉ. राजेश पसरीचा ने जारी कर दिया, जबकि वास्तविक स्थिति इसके विपरीत थी। स्टोर कीपर रूप सिंह ने भी फर्जी दस्तावेज बनाकर रिकॉर्ड में सामान दर्ज कराया। सीबीआई की एफआईआर में आरोप है कि इस घोटाले में कुल 2.73 करोड़ रुपये का अनियमित नुकसान हुआ। इसके अंतर्गत आरोपी अधिकारियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। ताज़ा स्थिति यह है कि इस घोटाले के बाद सीबीआई ने एम्स ऋषिकेश में अन्य प्रकरणों की भी समीक्षा शुरू कर दी है, और इस घोटाले को सार्वजनिक स्वास्थ्य और सरकारी निगरानी में कमी की गंभीर मिसाल माना जा रहा है

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संपादक : एफ यू खान

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