काशीपुर की ओर से ग्राम कुल्हा में बुधवार को हुई कृषक बैठक में खेती के तरीके बताए गए। गन्ना विभाग के प्रचार एवं जनसंपर्क अधिकारी नीलेश कुमार ने नई सट्टा नीति की जानकारी दी। कहा कि शरद कालीन गन्ना बुवाई का समय आ गया है। गन्ना किसान अपनी खेत की अच्छी सी तैयारी कर लें। उत्तम बीज का चयन करें। खेत का निरीक्षण करें।जो बीमारी के लक्षण उसमें पाए जाए, उसका फोटो लेकर गन्ना शोध केंद्र के वैज्ञानिकों के को प्रेषित करें। जिससे उसे फोन पर ही तत्काल सहायता उपलब्ध कर दी जाएगी। गोष्ठी का उद्देश्य गन्ना कृषकों को उन्नत प्रजाति की गन्ना बीज की जानकारी, गन्ने की फसल में लगने वाली तरह-तरह के बीमारियों तथा उसमें प्रयोग की जाने वाली दवाएं तथा उनको गन्ने की वैज्ञानिक विधि से कृषि कैसे करें । जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़े इसकी जानकारी कृषकों को प्रदान करना है ।गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वर्तमान में 15023. , 13235, 14201 जैसी उन्नतशील प्रजातियां है।जिनको गन्ना कृषकों को प्रोत्साहित करना चाहिए।वर्तमान में 0238 रेड रोड की चपेट में आ गई है।किसान इस प्रजाति के गन्ने की बुवाई बिल्कुल भी न करें । अतः कृषकों को चाहिए कि वह इसका रिप्लेस करें। वैज्ञानिकों द्वारा कीट एवं रोग प्रबंधन के विषय में भी विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इस बैठक में गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक संजय कुमार, प्रमोद कुमार आदि मौजूद थे।
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