सर्दियों में धुंध पर ड्रोन से बरसेगा पानी: उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बनाई योजना, कृषि विभाग भी देगा सहयोग

देहरादून। सर्दियों के मौसम में प्रदूषण और धुंध की समस्या से निपटने के लिए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने एक अनोखी पहल शुरू की है। इस बार राज्य के कई शहरों में ड्रोन के माध्यम से पानी का छिड़काव किया जाएगा, ताकि धूल और धुंध की परत को कम किया जा सके। इस कार्य में कृषि विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।पिछले वर्ष सर्दियों में राजधानी देहरादून में घनी धुंध की स्थिति बनी थी, जिससे आमजन को सांस लेने में परेशानी और दृश्यता में भारी कमी का सामना करना पड़ा था। तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रयोग के तौर पर ड्रोन से कई स्थानों पर पानी का छिड़काव कराया था, जिससे सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। अब उसी तर्ज पर इस साल योजना को और व्यापक रूप में लागू किया जा रहा है।पीसीबी के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि इस बार केवल देहरादून ही नहीं, बल्कि हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार सहित अन्य औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में भी ड्रोन की मदद से पानी का छिड़काव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ धूल और धुंध की अधिक समस्या होगी, वहाँ यह तकनीक तुरंत लागू की जाएगी।डॉ. धकाते के अनुसार, प्रत्येक ड्रोन एक बार में लगभग दस लीटर पानी लेकर उड़ान भर सकता है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में तेज़ी से छिड़काव संभव हो सकेगा। इसके लिए न केवल सरकारी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा, बल्कि निजी क्षेत्र से भी ड्रोन मंगवाने की योजना बनाई गई है, ताकि अभियान को बड़े पैमाने पर चलाया जा सके।उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि धूलकण और प्रदूषक तत्वों के कारण होने वाली धुंध को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस दिशा में सभी जिलों को तैयारी के निर्देश दे दिए हैं।डॉ. धकाते ने यह भी बताया कि दिवाली के मद्देनज़र हवा की गुणवत्ता की निगरानी पहले से ही शुरू कर दी गई है। राज्य के विभिन्न शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की नियमित निगरानी की जा रही है। प्रदूषण स्तर बढ़ने की स्थिति में तुरंत नियंत्रणात्मक कदम उठाए जाएंगे।कृषि विभाग के सहयोग से इस तकनीक को ग्रामीण इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों में भी आजमाने की योजना है। बोर्ड का मानना है कि इस प्रयोग से प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल नवाचार का उदाहरण है, बल्कि राज्य में बढ़ते शहरी प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है। यदि यह पहल सफल रहती है, तो इसे अन्य जिलों में भी स्थायी रूप से लागू किया जा सकता है।

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संपादक : एफ यू खान

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