टनकपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शारदा तट को ऐतिहासिक स्वरूप देने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि यह सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि उनकी आत्मा और आस्था से जुड़ा व्रत है। शुक्रवार को टनकपुर में शारदा कारीडोर के तहत रिवर फ्रंट पथ के सुंदरीकरण कार्य का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा, “2022 में मुझे लगा कि मैं शारदा से दूर हो गया हूं, लेकिन शारदा मैया ने मुझे खुद से अलग नहीं होने दिया।”सीएम धामी ने भावुक होते हुए कहा कि शारदा और चंपावत की जनता के प्रेम ने उन्हें प्रदेश की सेवा करने का अवसर दिया, और तभी उन्होंने निश्चय किया था कि शारदा तट को एक ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप देकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनका शारदा नदी से गहरा लगाव रहा है — “मैं शारदा के साथ कूदते, नहाते और फांदते बड़ा हुआ हूं। जब भी शारदा के पास आता हूं, भावविभोर हो जाता हूं।”मुख्यमंत्री ने बताया कि शारदा घाट पर आरती की परंपरा शुरू हो चुकी है, और आने वाले समय में यह स्थान हर की पैड़ी की तरह श्रद्धा और पर्यटन का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा — “कल्पना कीजिए उस दृश्य की जब शारदा घाट पर हर शाम आरती की गूंज होगी, और उसकी दिव्य छवि लहरों में उतर जाएगी।”सीएम धामी ने कहा कि शारदा रिवर फ्रंट बनने से यह तट न केवल धार्मिक, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। देश-विदेश से पूर्णागिरि धाम आने वाले श्रद्धालु अब सीधे लौटने के बजाय चंपावत में कुछ दिन ठहरेंगे, आसपास के स्थलों जैसे बूम, चूका, खलढूंगा, और ठुलीगाड़ — जहां कभी जिम कार्बेट घूमा करते थे — वहां के ईको रिज़ॉर्ट्स में रुकेंगे और स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेंगे।उन्होंने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति, पर्यटन को प्रोत्साहन, और आस्था के केंद्रों को नया जीवन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि यह सिर्फ निर्माण कार्य नहीं, बल्कि “शारदा मैया के चरणों में मेरी भावनात्मक भेंट है, जिसे भव्यता और श्रद्धा से साकार किया जाएगा।”
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