उत्तराखंड के शहरों में धूल से बिगड़ रही हवा की सेहत, काशीपुर-देहरादून-ऋषिकेश में चल रहा एनसीएपी अभियान

देहरादून।उत्तराखंड के प्रमुख शहरों — देहरादून, काशीपुर और ऋषिकेश — में बढ़ती धूल ने हवा की गुणवत्ता को चिंताजनक स्तर तक पहुंचा दिया है।उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) ने इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत अभियान शुरू किया है। बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इन शहरों में हवा की सेहत खराब होने का सबसे बड़ा कारण धूल प्रदूषण है।—देहरादून में 56% प्रदूषण का कारण सड़क की धूलएनसीएपी के तहत किए गए विश्लेषण में पाया गया कि राजधानी देहरादून में प्रदूषण स्तर को बढ़ाने में सबसे अधिक योगदान सड़क की धूल का है, जो कुल प्रदूषण का 56 प्रतिशत हिस्सा है।इसके अलावा —जंगल की आग से होने वाला धुआं 19 प्रतिशत,वाहनों से निकलने वाला धुआं 7 प्रतिशत,भवन निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्य 9 प्रतिशत तक प्रदूषण में योगदान दे रहे हैं।इसके अतिरिक्त अन्य छोटे स्रोत भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।—कई स्तरों पर शुरू हुआ नियंत्रण अभियानप्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई स्तरों पर कार्य प्रारंभ किया गया है।इनमें सड़क की नियमित सफाई, धूल नियंत्रण के लिए वॉटर स्प्रिंकलिंग, निर्माण स्थलों पर कवरिंग अनिवार्य करना, वाहन उत्सर्जन की निगरानी और हरित पट्टियों का विस्तार जैसे कदम शामिल हैं।एनसीएपी के तहत इन तीनों शहरों में हवा की गुणवत्ता (Air Quality Index – AQI) को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने का लक्ष्य रखा गया है।बोर्ड का कहना है कि यदि शहरी निकाय, निर्माण एजेंसियां और आम नागरिक मिलकर छोटे-छोटे सुधार करें, तो प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।—धूल ही सबसे बड़ा शत्रुविशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड के मैदानों वाले क्षेत्रों — खासकर काशीपुर और ऋषिकेश — में भी धूल प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।सड़क किनारे निर्माण सामग्री का खुला भंडारण, अधूरी सड़कें और वाहनों की बढ़ती संख्या हवा में महीन कणों (PM-10) की मात्रा को खतरनाक स्तर तक पहुंचा रही हैं।—प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नागरिकों से अपील की है कि निर्माण सामग्री को ढककर रखें, वाहन के उत्सर्जन की समय-समय पर जांच कराएं, और अनावश्यक जलाने की गतिविधियों से बचें, ताकि वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके।

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संपादक : एफ यू खान

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