नैनीताल। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के दो अधिकारियों के लिए नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर आई है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को रद्द कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुनाया।यह पूरा मामला एचपीसीएल के एक पूर्व एलपीजी डीलर मेसर्स देव भूमि गैस सर्विस से जुड़ा था। डीलर ने अधिकारियों — विनीत कुमार गोयल और एक अन्य — पर दस्तावेजों की जालसाजी और हेरफेर करने का आरोप लगाया था। आरोपों के अनुसार, डीलरशिप अनुबंध की शर्तों को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए थे, जिसके बाद डीलर ने आपराधिक शिकायत दायर की थी।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूरे प्रकरण की कानूनी स्थिति पर विस्तार से विचार करते हुए कहा कि यह विवाद मूल रूप से अनुबंध की शर्तों से जुड़ा सिविल विवाद है, न कि आपराधिक अपराध। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यावसायिक या अनुबंधिक असहमति को आपराधिक रंग देना न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।न्यायमूर्ति पुरोहित ने अपने आदेश में यह कहा कि “जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मंशा या ठोस सबूत न हों, तब तक केवल अनुबंध संबंधी मतभेद के आधार पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।” कोर्ट ने माना कि अभियुक्त अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप आपराधिक कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं।इस निर्णय के साथ ही एचपीसीएल अधिकारियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर पूर्ण विराम लग गया है। अब यह मामला केवल अनुबंधिक और प्रशासनिक स्तर पर ही रहेगा, जहां निपटारे के लिए सिविल या वैधानिक उपायों का सहारा लिया जा सकेगा।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कॉर्पोरेट और सरकारी अधिकारियों के लिए एक अहम नजीर पेश करेगा, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि अनुबंधिक विवादों में आपराधिक मुकदमेबाजी का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए। इससे भविष्य में इस तरह के मामलों में अदालतों को भी दिशा-निर्देश मिलेगा कि सिविल और आपराधिक विवादों की रेखा कहाँ खींची जानी चाहिए।एचपीसीएल सूत्रों ने बताया कि अदालत के इस निर्णय से संबंधित अधिकारियों की प्रतिष्ठा बहाल हुई है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अब स्वतः निरर्थक हो गए हैं। अदालत का यह आदेश फिलहाल एलपीजी डीलरशिप से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है
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