देहरादून। प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों की तैयारियों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चुनावी बिगुल बजते ही गांव-गांव में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जहां निर्वाचित प्रधान वार्ड सदस्य पदों के दावेदारों के बीच संतुलन बनाने में जुटे हैं, वहीं कई जगहों पर इन पदों को लेकर जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही है। सहकारी समितियों में डायरेक्टर पदों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी अब पंचायत वार्डों के चुनाव को हवा दे रहे हैं, जिससे इन पंचायतों में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है।प्रदेश में सहकारी समितियों के चुनावों को लेकर कार्यक्रम पहले ही जारी किया जा चुका है। 10 नवंबर को समिति कार्यालयों पर अनंतिम मतदाता सूची के प्रदर्शन के साथ चुनावी प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। इसके साथ ही नवंबर के अंत तक ग्राम पंचायत चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज हो गई हैं।विभागीय सूत्रों के अनुसार, बीते दिनों जिले की कुल 409 ग्राम पंचायतों में से 117 पंचायतों में वार्ड सदस्यों के 801 पदों पर नामांकन नहीं हो सका था। इस कारण ये सीटें खाली रह गई थीं। वहीं, 2596 वार्डों पर सदस्य निर्वाचित घोषित किए गए थे। लेकिन दो-तिहाई कोरम पूरा न होने के चलते 117 प्रधान अपने पद की शपथ नहीं ले सके थे। अब जबकि वार्ड सदस्य पदों पर नामांकन प्रक्रिया फिर से शुरू होने जा रही है, तो बड़ी संख्या में लोग इन पदों के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।कई पंचायतों में यह चुनाव सामाजिक प्रतिष्ठा और स्थानीय प्रभाव का भी सवाल बन गया है। प्रधानों पर अपने समर्थकों को संतुलित रखने का दबाव बढ़ गया है, वहीं दावेदारों में टिकट और समर्थन पाने की होड़ लगी हुई है। ग्रामीण राजनीति के इस दौर में पुराने समीकरण टूटते और नए गठजोड़ बनते नजर आ रहे हैं, जिससे इस बार के ग्राम पंचायत चुनाव बेहद दिलचस्प होने के संकेत दे रहे हैं।
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