विधि-विधान के साथ बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद, अंतिम दर्शनों के साथ वार्षिक यात्रा का समापन

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित भगवान विष्णु के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट मंगलवार दोपहर शीतकाल के लिए विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। परंपरा के अनुसार, ठीक 2 बजकर 56 मिनट पर मुख्य पुजारी और तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में विशेष अनुष्ठान सम्पन्न हुए, जिनके बाद कपाटों को औपचारिक रूप से बंद किया गया। कपाट बंद होने के साथ ही बद्रीनाथ धाम की वार्षिक यात्रा का समापन हो गया, जो इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से परिपूर्ण रही। अंतिम दर्शन के अवसर पर सुबह से ही धाम परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। भक्तों ने मंदिर में प्रवेश कर भगवान बद्रीनाथ के दर्शन किए और कपाट बंद होने से पहले अंतिम पूजा-अर्चना में भाग लिया।मंदिर प्रशासन और बदरी-केदार मंदिर समिति के अनुसार, समापन दिवस पर विशेष पुष्प-सज्जा के साथ भगवान की मूर्ति का पारंपरिक शृंगार किया गया। इसके बाद अलंकार, रत्नाभूषण और नित्य पूजा से जुड़े अवयवों को सुरक्षित रूप से संजोया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कपाट बंद होने की प्रक्रिया एक विस्तृत परंपरा के तहत होती है, जिसमें मूर्ति को ऊनी वस्त्रों में लपेटने से लेकर अग्नि-शांतिकारक मंत्रोच्चार तक कई अनुष्ठान किए जाते हैं। कपाट बंद होने के बाद अब शीतकालीन पूजा जोशीमठ के पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बदरी मंदिर में आयोजित की जाएगी, जहां अगले छह महीनों तक भगवान बद्रीनाथ की पूजा-सेवा परंपरा अनुसार जारी रहेगी।स्थानीय प्रशासन ने बताया कि कपाट बंद होने से पहले तीर्थयात्री स्नोफॉल की आशंका के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंच रहे थे। मार्गों पर सुरक्षा और सुगम आवागमन की विशेष व्यवस्था की गई थी। धाम में मौजूद साधु-संतों, पुजारियों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक भजनों, शंख-ध्वनि और वेद मंत्रों के बीच इस धार्मिक प्रक्रिया को संपन्न होते देखा। हर वर्ष की तरह, कपाट बंद होने का यह क्षण भक्तों के लिए भावुकता और भक्ति से भरपूर रहा, क्योंकि अब धाम अगले वर्ष गर्मियों में ही पुनः दर्शन के लिए खुलेगा।

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संपादक : एफ यू खान

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