काशीपुर। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गौतम मेहरोत्रा ने कहा कि चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूचियों को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ सीर की शुरुआत की है। इसके लिए जनता को जागरूक करने हेतु करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं। आयोग को उम्मीद है कि सिर के बाद मतदाता सूची काफी हद तक सटीक होगी, फर्जी मतदान की गुंजाइश घटेगी और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। इधर, आम जनमानस के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि इससे पूर्व मतदाता सूची तैयार करने के लिए नियुक्त किये जाने वाले बूथ लेबल ऑफीसर (बीएलओ) के खिलाफ क्यों कार्यवाही अमल में लाना जरूरी नहीं समझा गया? लोकतांत्रिक देश भारत में बीएलओ की लापरवाही से हजारों लोग मतदान के अपने अधिकार से वंचित रह जाते हैं। आम जनमानस का कहना है कि चुनाव आयोग को बीएलओ के खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में मतदाता सूची से जुड़ी कमियां बार-बार सामने आती रही हैं, कई मृत व्यक्तियों के नाम, एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग पते, और शहरी क्षेत्रें में तेजी से बढ़ते प्रवास के कारण बेमेल डाटा! दूसरी ओर, 18 वर्ष पूरे कर चुके लाखो युवाओं का नाम जुड़ने में देरी होना सबसे बड़ा लोकतांत्रिक नुकसान है। कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष गौतम मेहरोत्र ने कहा कि बीएलओ की लापरवाही से गलत सरकार चुनी जाती है, क्योंकि वास्तविक के बजाय अवास्तविक लोग मतदान करते हैं और इससे लोकतंत्र प्रभावित होता है। हालांकि, उन्होंने आमजन से आहवान किया कि उत्तराखड में सिर लागू होने पर नियमानुसार सभी इसका पालन करें और अन्य को भी इस हेतु प्रेरित करें, ताकि स्वस्थ लोकतंत्र की परंपरा बनी रहे।
संपादक : एफ यू खान
संपर्क: +91 9837215263
