त्रियुगीनारायण बना देश का तेज़ी से उभरता वेडिंग डेस्टिनेशन: 300 से ज्यादा शादियां, स्थानीय आर्थिकी में भारी उछाल

रुद्रप्रयाग जिले का त्रियुगीनारायण गांव, जो भगवान शिव और माता पार्वती की पौराणिक परिणय भूमि के रूप में प्रसिद्ध है, आज देशभर में तेजी से एक बड़े वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। यहां के त्रियुगीनारायण मंदिर में इस वर्ष अब तक 300 से अधिक जोड़े विवाह कर चुके हैं, जिससे यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन और डेस्टिनेशन वेडिंग दोनों का मुख्य केंद्र बन गया है। शादियों की इस बढ़ती लोकप्रियता ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को अप्रत्याशित बढ़ावा दिया है—गांव और आसपास के क्षेत्रों में होटल तथा होमस्टे की बुकिंग में भारी वृद्धि हुई है, जबकि पुजारी समुदाय की व्यस्तता पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई है। इसके साथ ही परिवहन सेवाओं, बैंड-बाजा संचालकों और फूल व्यवसायियों की कमाई में भी उल्लेखनीय इज़ाफा हुआ है, जिससे पूरे क्षेत्र की आजीविका पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। इस वेडिंग ट्रेंड को नई दिशा तब मिली जब थराली (चमोली) के खंड विकास अधिकारी नितिन धानिया ने भी अपने विवाह के लिए त्रियुगीनारायण को चुना। प्रशासनिक स्तर से मिली इस अनूठी पहल ने न केवल इस स्थल की विश्वसनीयता बढ़ाई, बल्कि देशभर के युवा जोड़ों के सामने त्रियुगीनारायण को एक सुरक्षित, धार्मिक और सुंदर विवाह स्थल के रूप में स्थापित कर दिया। इसके बाद से यहां विवाह कराने की मांग तेजी से बढ़ी है और लगातार जोड़े इस पौराणिक स्थल पर सात फेरे लेने के लिए पहुंच रहे हैं। धार्मिक महत्व, मनमोहक प्राकृतिक दृश्य, शांत वातावरण और स्थानीय लोगों द्वारा मिल रही बेहतर सुविधाओं ने मिलकर त्रियुगीनारायण को उत्तराखंड का सबसे तेजी से विकसित होता वेडिंग हब बना दिया है, जो स्थानीय विकास और रोजगार का बड़ा आधार बन चुका है।

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संपादक : एफ यू खान

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