देहरादून। उत्तराखंड में औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को तेज करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और प्रभावी कदम उठाया है। कैबिनेट ने वाणिज्यिक भूखंडों पर भवन निर्माण से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण शर्त—भू-आच्छादन (Ground Coverage) की बाध्यता—को समाप्त कर दिया है। नए निर्णय के अनुसार अब किसी भी व्यावसायिक भूखंड पर सेटबैक छोड़ने के बाद जमीन के 100 प्रतिशत हिस्से पर निर्माण किया जा सकेगा। अभी तक यह सीमा अधिकतम 75 प्रतिशत थी, जिसके कारण निवेशकों और कारोबारियों को स्पेस संबंधी बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।सरकार के अनुसार यह फैसला प्रदेश में औद्योगिक विस्तार, स्टार्टअप संस्कृति और व्यावसायिक निवेश को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अधिक निर्माण क्षेत्र उपलब्ध होने से बड़े दफ्तर, व्यावसायिक इकाइयाँ और मल्टी-यूटिलिटी बिल्डिंग्स विकसित करना आसान होगा।कैबिनेट बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य में स्पेशल टाउनशिप विकसित करने के लिए उत्तराखंड टाउन प्लानिंग स्कीम में महत्वपूर्ण संशोधन किए जाएंगे, जिससे नियोजित और आधुनिक शहरी विकास को गति मिलेगी। इन संशोधनों के तहत संरचित, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप टाउनशिप मॉडल लागू किया जाएगा, जिसमें व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी, ग्रीन स्पेस और कमर्शियल ज़ोन को समाहित किया जाएगा।इसके अलावा राज्य के शहरी क्षेत्रों में योजनाबद्ध विकास के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल करने के उद्देश्य से उत्तराखंड लैंड पूलिंग योजना में भी परिवर्तन को मंजूरी दी गई है। नए बदलावों के तहत भूमि अधिग्रहण से जुड़ी बाधाएं कम होंगी, और विकास प्राधिकरणों को बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए आवश्यक भूमि बिना विवाद व देरी के प्राप्त करने में आसानी होगी।राज्य सरकार का दावा है कि इन तीन बड़े सुधारों से उत्तराखंड में निवेश, रोजगार और आधुनिक शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी, साथ ही प्रदेश को औद्योगिक रूप से अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।
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