समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़े संशोधन विधेयक को राज्यपाल ने आपत्ति के साथ शासन को वापस लौटा दिया है। राज्यपाल द्वारा विधेयक लौटाए जाने के बाद अब संबंधित विभाग इसकी दोबारा समीक्षा और परीक्षण करेगा। इसके बाद आपत्तियों को दूर करते हुए संशोधित विधेयक को पुनः विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।गौरतलब है कि गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने यूसीसी संशोधन विधेयक को सदन से पारित कराकर लोक भवन भेजा था। लेकिन विधेयक के परीक्षण के दौरान इसमें एक तकनीकी कमी सामने आई। विधेयक की धारा-4 में निर्धारित आयु से कम में विवाह करने पर सजा के प्रावधान का दो बार उल्लेख किया गया था, जिस पर लोक भवन ने आपत्ति जताई।इस आपत्ति के चलते राज्यपाल ने संशोधन विधेयक को शासन को लौटा दिया। अब गृह विभाग इस आपत्ति का निस्तारण करेगा और आवश्यक सुधार करते हुए संशोधित अध्यादेश को दोबारा विधानसभा में लाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब किसी विधेयक को आपत्ति के साथ लौटाया गया हो। इससे पहले धर्मांतरण से संबंधित विधेयक को भी लोक भवन द्वारा शासन को वापस किया जा चुका है। उस विधेयक में पाई गई कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी धर्मस्व विभाग को सौंपी गई थी।धर्मस्व विभाग भी संबंधित सभी तकनीकी और कानूनी कमियों को दूर करते हुए संशोधित विधेयक लाने की तैयारी कर रहा है। शासन स्तर पर दोनों विधेयकों को लेकर समीक्षा की प्रक्रिया जारी है, ताकि संशोधन के बाद इन्हें दोबारा सदन में पेश किया जा सके।
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