देहरादून।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य से बाहर निवास कर रहे प्रवासी उत्तराखंडी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं और वे जहां भी रहते हैं, वहां उत्तराखंड की लोक संस्कृति, विरासत और परंपराओं को पूरी निष्ठा से जीवंत बनाए हुए हैं। यह न केवल राज्य के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान करने वाला प्रयास भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था से जुड़े प्रवासी उत्तराखंडवासी वास्तव में राज्य के ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभा रहे हैं।मुख्यमंत्री शनिवार को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर स्थित नोएडा स्टेडियम में पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित सात दिवसीय ‘महाकौथिग’ में प्रतिभाग करने पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि महाकौथिग केवल एक सांस्कृतिक मेला नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की आत्मा, उसकी लोक चेतना और परंपरागत जीवनशैली को सजीव रूप में प्रस्तुत करने वाला मंच है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकौथिग के माध्यम से उत्तराखंड की लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान को व्यापक पहचान मिल रही है। ऐसे आयोजन राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे आधुनिक समय के अनुरूप प्रस्तुत करने का कार्य भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मंच कलाकारों, कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रहा है।उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड के पारंपरिक और जैविक उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि बद्री गाय के शुद्ध घी, मोटे अनाज (मिलेट्स), जैविक कृषि उत्पाद, पहाड़ी दालें, मसाले और अन्य पारंपरिक वस्तुएं आज देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही हैं। महाकौथिग जैसे आयोजनों के माध्यम से इन उत्पादों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और सम्मान प्राप्त हो रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय किसानों को भी लाभ मिल रहा है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की लोक संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने प्रवासी उत्तराखंडवासियों से आह्वान किया कि वे इसी प्रकार अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखें और उत्तराखंड की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहें।
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