राज्य कैबिनेट की बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए नेचुरल गैस पर वैट की दर 20 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे उद्योगों और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। कृषि क्षेत्र में धराली और आसपास के आपदाग्रस्त इलाकों के लिए सेब के न्यूनतम मूल्य तय किए गए हैं, जिनमें रॉयल डिलिशियस सेब का मूल्य 51 रुपये प्रति किलो और अन्य रेड डिलिशियस सेब का मूल्य 45 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया है। संस्कृति विभाग के अंतर्गत कलाकारों और लेखकों को दी जाने वाली मासिक पेंशन को 3000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये कर दिया गया है।ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए अब निम्न जोखिम वाले आवासीय एवं छोटे व्यावसायिक भवनों के नक्शे एम्पनल्ड आर्किटेक्ट द्वारा पास कराए जा सकेंगे, जिसे कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी मिल गई है। औद्योगिक विकास के तहत एमएसएमई और औद्योगिक इकाइयों के लिए ग्राउंड कवरेज बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही बांस एवं रेशा विकास परिषद के ढांचे में बदलाव करते हुए तकनीकी पदों पर उपनल के बजाय आउटसोर्सिंग से नियुक्ति की व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसके तहत 13 पद कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे।स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान योजनाओं को 100 प्रतिशत इंश्योरेंस मोड में संचालित करने का फैसला लिया गया है, जबकि गोल्डन कार्ड योजना हाइब्रिड मोड में चलेगी। पांच लाख रुपये तक के क्लेम का भुगतान इंश्योरेंस के माध्यम से और पांच लाख रुपये से अधिक के क्लेम ट्रस्ट मोड से किए जाएंगे। महंगाई दर के अनुसार कर्मचारियों से लिया जाने वाला अंशदान 250 रुपये से बढ़ाकर लगभग 450 रुपये तक किया जाएगा। सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन देने को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है।चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा संशोधन नियमावली को मंजूरी देते हुए प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की सेवानिवृत्ति आयु 50 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए अलग विभाग बनाए जाएंगे और स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट, हल्द्वानी के लिए चार नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में समान कार्य, समान वेतन से जुड़े मामले में 277 कर्मचारियों को लाभ दिए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट उपसमिति को भेजा गया है। वहीं दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों को 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता देने का निर्णय लिया गया है, जिससे करीब 300 डॉक्टरों को लाभ मिलेगा।
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