अरावली पर्वतमाला पर गहराता संकट, #SaveAravali अभियान के बीच विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी

देश की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में शामिल अरावली को लेकर इन दिनों देशभर में चर्चा तेज है। अरावली के संरक्षण को लेकर #SaveAravali अभियान भी चलाया जा रहा है, वहीं पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार इसके बिगड़ते स्वरूप को लेकर चिंता जता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली केवल एक पर्वतमाला नहीं, बल्कि उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है और इसका क्षरण कई बड़े खतरों को जन्म दे सकता है।जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट साइंसेस के प्रोफेसर डॉ. सुदेश यादव और आईआईटी के अर्थ साइंस विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव के अनुसार अरावली भूजल संरक्षण, जलवायु संतुलन और मरुस्थलीकरण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन क्षेत्र में बढ़ता खनन, अनियंत्रित निर्माण और वन क्षेत्रों की कटाई इस प्राचीन पर्वतमाला को लगातार कमजोर कर रही है।विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस संरक्षण कदम नहीं उठाए गए, तो अरावली का संकट केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जल संकट, तापमान में वृद्धि और पारिस्थितिक असंतुलन जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। उनका कहना है कि अरावली के संरक्षण के लिए नीति स्तर पर सख्त फैसलों और प्रभावी अमल की तत्काल आवश्यकता है।

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संपादक : एफ यू खान

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