सॉल्वर ऋषि की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। आरोपी से जुड़े डिजिटल और बायोमीट्रिक डेटा की गहन जांच में यह सामने आया है कि उसके जरिए नौकरी पाने वाले 12 लोग भी इस पूरे मामले में लाभार्थी रहे हैं। अब पुलिस इन सभी को एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा मानते हुए कार्रवाई की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ऋषि ने इन 12 लोगों से कितनी रकम वसूली और क्या इस नेटवर्क में बैंक या परीक्षा केंद्र से जुड़ा कोई अन्य कर्मचारी भी शामिल था।जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि आईबीपीएस के सॉफ्टवेयर सिस्टम ने पहले ही कुछ तकनीकी विसंगतियों को पकड़ लिया था। इन्हीं संकेतों के आधार पर संबंधित बैंकों ने अपने 12 कर्मचारियों को पहले ही निलंबित कर दिया था। हालांकि उस समय यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि परीक्षा में बैठने वाला वास्तविक व्यक्ति कौन था। ऋषि की गिरफ्तारी के बाद जब उसका फोटो और बायोमीट्रिक रिकॉर्ड पुराने डेटा से मिलाया गया, तो सभी 12 मामलों में उसी की संलिप्तता सामने आई।जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने अपनी उच्च तकनीकी समझ और शिक्षा का इस्तेमाल कर परीक्षा प्रणाली की खामियों का फायदा उठाया। वह हर बार भेष बदलकर या फोटो मिक्सिंग जैसी तकनीकों के जरिए परीक्षा में बैठता था। पुलिस अब निलंबित किए गए सभी 12 कर्मचारियों की सूची की गहन जांच कर रही है और जल्द ही उन्हें पूछताछ के लिए देहरादून तलब किया जा सकता है।इन तथ्यों के सामने आने के बाद पुलिस का यह दावा और मजबूत हुआ है कि ऋषि एक पेशेवर सॉल्वर के तौर पर काम कर रहा था, हालांकि आरोपी का कहना है कि इस बार वह स्वयं के लिए परीक्षा दे रहा था। फिलहाल उसके दस्तावेजों, लेनदेन और नेटवर्क की बारीकी से जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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