उत्तराखंड में वर्दीधारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और एकरूप बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य के विभिन्न विभागों में दरोगा और कांस्टेबल भर्ती के लिए अब तक लागू अलग-अलग नियमावलियों को समाप्त कर पहली बार एकीकृत भर्ती नियमावली लागू कर दी गई है। गुरुवार को जारी अधिसूचना के अनुसार अब सभी विभागों में दरोगा और कांस्टेबल स्तर के पदों पर चयन के लिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करने के बजाय एक ही परीक्षा आयोजित होगी। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल युवाओं को अधिक अवसर देगा बल्कि भर्ती प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाएगा।इस नई नियमावली के तहत पुलिस उप निरीक्षक (एसआई), अभिसूचना विभाग, पीएसी और आईआरबी में प्लाटून कमांडर और गुल्मनायक, अग्निशमन विभाग में द्वितीय अधिकारी, जेल विभाग में उप कारापाल, होमगार्ड विभाग में प्लाटून कमांडर, वन विभाग में वन दरोगा, आबकारी विभाग में आबकारी उप निरीक्षक और युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती अब एकीकृत परीक्षा प्रणाली के माध्यम से होगी। पहले उम्मीदवारों को इन सभी विभागों के लिए अलग-अलग फॉर्म भरने और कई तरह की परीक्षाएं देने पड़ती थीं, जिससे समय, संसाधन और ऊर्जा की भारी खपत होती थी। अब एक परीक्षा के जरिए उम्मीदवारों को सभी विभागों में अवसर मिलेगा और मेरिट के आधार पर विभाग आवंटन किया जाएगा।राज्य सरकार ने इस अधिसूचना में आयु सीमा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पहले हर विभाग के लिए अलग-अलग आयु सीमा तय थी, जिससे अभ्यर्थियों को अक्सर असमंजस का सामना करना पड़ता था और कई बार वे अपनी पात्रता खो देते थे। नई नियमावली में सभी विभागों के लिए एक समान आयु सीमा तय की गई है, जिससे प्रतियोगी छात्रों को अधिक समय और समान अवसर मिलेगा। यह बदलाव उन युवाओं के लिए बड़ा राहतभरा कदम है जो अलग-अलग विभागों की आयु सीमा के कारण पिछली बार परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से युवाओं को तैयारी करने और परीक्षा में भाग लेने के अधिक अवसर मिलेंगे।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सुधार को राज्य की रोजगार नीति में बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होगी और युवाओं को भ्रम की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के हित में लगातार निर्णय ले रही है और यह बदलाव भी उसी दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। नई व्यवस्था से आयोग को भी परीक्षा कराने और परिणाम घोषित करने में आसानी होगी, क्योंकि अब हर विभाग के लिए अलग-अलग विज्ञापन और प्रक्रिया चलाने की जरूरत नहीं रहेगी।इस निर्णय के बाद राज्य के प्रतियोगी छात्र और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि अब उन्हें तैयारी के लिए एक ही पैटर्न और सिलेबस पर फोकस करना होगा और चयन के अवसर भी बढ़ जाएंगे। पहले अलग-अलग विभागों की अलग-अलग परीक्षा, अलग-अलग शारीरिक मानक और अलग-अलग कटऑफ के कारण अभ्यर्थियों को परेशानी होती थी, लेकिन अब स्थिति बिल्कुल स्पष्ट हो गई है। इससे न केवल युवाओं का समय बचेगा बल्कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता भी आएगी।विशेषज्ञों का मानना है कि एकीकृत भर्ती नियमावली से उत्तराखंड में वर्दीधारी पदों पर चयन का एक नया मॉडल तैयार होगा, जो सिविल सर्विस पैटर्न जैसा होगा। इसमें अभ्यर्थी एक ही परीक्षा में बैठकर कई विभागों के लिए पात्र हो सकेगा और मेरिट सूची के आधार पर उसे पद आवंटित किया जाएगा। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनेगी तथा सरकारी तंत्र में भी भर्ती संबंधी पारदर्शिता बढ़ेगी।राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नया सिस्टम युवाओं को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लागू किया गया है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक नतीजे देखने को मिलेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय न केवल युवाओं को फायदा देगा बल्कि विभागों में कर्मियों की कमी को दूर करने और भर्ती प्रक्रिया को गति देने में भी सहायक होगा। नई नियमावली को उत्तराखंड की भर्ती प्रणाली में अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक सुधार माना जा रहा है।
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