नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर में इस साल दिवाली, गुरुपर्व और क्रिसमस पर ग्रीन पटाखों की बिक्री और फोड़ने की अनुमति मिलने की संभावना बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ सोमवार को इस पर विस्तृत आदेश जारी करेगी। अदालत ने संकेत दिए हैं कि केवल ग्रीन आतिशबाजी — यानी पर्यावरण मानकों को पूरा करने वाले पटाखों — के उत्पादन, बिक्री और उपयोग की अनुमति दी जाएगी। केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार ने भी अदालत के समक्ष ग्रीन क्रैकर्स के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया है।यह फैसला पाँच साल के लंबे अंतराल के बाद पटाखों पर लगी सख्त पाबंदी में आंशिक राहत ला सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं, लेकिन इनमें मौजूद सूक्ष्म कण (Particulate Matter) फिर भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि कई पर्यावरण विशेषज्ञ यह चिंता जता रहे हैं कि केवल ग्रीन क्रैकर्स के इस्तेमाल को व्यवहार में लाना और इसकी निगरानी करना बड़ी चुनौती साबित होगा।सीएसआईआर-नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) के वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रीन क्रैकर्स में कुछ तकनीकी बदलाव किए गए हैं जिससे प्रदूषण घटाया जा सके। इनमें पटाखे के खोल का आकार छोटा किया जाता है, राख (ash) का उपयोग बंद कर दिया गया है और उत्सर्जन को सीमित करने के लिए विशेष योजक (dust suppressing additives) मिलाए जाते हैं। साथ ही, इनके निर्माण में रासायनिक तत्वों की मात्रा भी पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम होती है।सुप्रीम कोर्ट का सोमवार को आने वाला फैसला देशभर में उत्सव मनाने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। यदि ग्रीन पटाखों को मंजूरी मिलती है तो यह देश में पर्यावरण-संतुलन और परंपरा दोनों के बीच एक संतुलित समाधान के रूप में देखा जाएगा।
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