नई दिल्ली। अब देशभर के स्कूलों में प्रवेश और परीक्षा शुल्क जमा करने की प्रक्रिया और आसान व पारदर्शी होने जा रही है। शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया है कि वे स्कूलों में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाएं। मंत्रालय ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य स्कूल प्रशासनिक कार्यों को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है।शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने से प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी और नकद लेनदेन से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा। यह कदम प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है, जो प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था को बढ़ावा देता है।मंत्रालय ने न केवल राज्यों को बल्कि अपने अधीन शैक्षणिक संस्थानों जैसे एनसीईआरटी (NCERT), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) को भी निर्देश दिए हैं कि वे डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपने संस्थागत ढांचे में शामिल करें।इससे छात्रों और अभिभावकों को ऑनलाइन माध्यम से आसानी से फीस जमा करने की सुविधा मिलेगी, वहीं स्कूल प्रबंधन के लिए वित्तीय अभिलेखों का रखरखाव और ऑडिट प्रक्रिया भी अधिक सरल और पारदर्शी हो जाएगी। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि धोखाधड़ी या लेनदेन में त्रुटियों की संभावना भी लगभग समाप्त हो जाएगी।इस पहल को देश के डिजिटल परिवर्तन अभियान के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और जवाबदेह बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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