दुबई/ काशीपुर। महापौर दीपक बाली की धर्मपत्नी श्रीमती उर्वशी दत्त बाली दुबई में आयोजित विश्व मेयर सम्मेलन के दौरान जिस साड़ी को पहनने से हिचकिचा रही थी उनकी वही साड़ी विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति की पहचान बन गई और जिसने भी उन्हें देखा वह उनकी भारतीय संस्कृति और साड़ी की प्रशंसा करता नजर आया। श्रीमती बाली बताती है कि 51 वर्ष की उम्र में मुझे पहली बार ज़िंदगी में इतना बड़ा अवसर मिला — जहाँ पूरी दुनिया के मेयर एक मंच पर एकत्र हुए। जब पता चला कि ड्रेस कोड फॉर्मल है, तो मन में दुविधा थी कि क्या पहनूं, कौन-सा रंग चुनूँ और किस तरह के जूते या आभूषण पहनूँ।समय बहुत कम था — केवल एक सप्ताह। फिर भी मैंने निश्चय किया कि मैं अपनी भारतीय परंपरा को अपने साथ लेकर जाऊंगी। क्योंकि दर्ज़ी इतनी जल्दी आठ जोड़ी वेस्टर्न परिधान तैयार नहीं कर पा रहा था, मैंने तत्परता में आठ साड़ियाँ साथ रख लीं। कभी नहीं सोचा था कि मेरी साड़ी पूरे सम्मेलन में चर्चा का विषय बन जाएगी। साड़ी सिर्फ एक परिधान नहीं बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान है। हर पल्लू में शालीनता है, हर मोड़ में एक कहानी है। जब कोई स्त्री साड़ी पहनती है, तो उसमें अनकही गरिमा, आत्मविश्वास और भारतीयता झलकती है।साड़ी में जो ग्रेस और एलीगेंस है, वह किसी और परिधान में नहीं।यह स्त्री को केवल सुंदर नहीं बनाती — बल्कि “संस्कारी और सशक्त” भी दिखाती है।आज जब पूरी दुनिया वेस्टर्न फैशन की ओर बढ़ रही है, तब हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी साड़ी अब भी भारतीय नारी की सबसे खूबसूरत पहचान है।सम्मेलन के दौरान मेरी साड़ी के रंग, बनावट और शैली की खूब प्रशंसा हुई।“Z & A Waste Management and General Transport” के स्टॉल पर एक विदेशी महिला मेरी साड़ी से इतनी प्रभावित हुई कि उसने मुझे एक उपहार भेंट किया — यह पल मेरे लिए बेहद गर्व का था। मैंने सम्मेलन के चारों दिन साड़ी ही पहनने का निर्णय लिया — और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी भारतीय वेशभूषा को अपनाया।

नतीजा यह हुआ कि हर दिन प्रशंसा का सिलसिला बढ़ता गया। मुझे गर्व है कि दुबई में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मेरी साड़ी ने भारत की संस्कृति, परंपरा और शालीनता का प्रतिनिधित्व किया। आज यह कहते हुए मुझे अत्यंत खुशी है कि मैं अपने नगर की प्रथम महिला प्रतिनिधि बनकर वहाँ पहुँची — और मेरी पहचान बनी भारतीय साड़ी से। काशीपुर के बच्चों के लिए संदेश काशीपुर के बच्चों —जितनी knowledge पा सको उतना पढ़ो और सीखो।पैसे बचाना सीखो, बेवजह ब्रांडेड सामान के पीछे मत भागो। 5000 की एक क्रीम किसी के घर का राशन बन सकती है — इसलिए पैसे को वेस्टेज मत करो।अपने देश की चीज़ों का उपयोग करो। बाहर के ब्रांड तुम्हें असली अमीर नहीं बनाते — देश को और खुद को अमीर बनाओ। खुद को एक ब्रांड बनाओ — सीखो, समझो, खर्च कम करो और ज़रूरत पर ही खर्च करो। जीवन में तनाव कम रखो, सामान कम और selected रखो,लेकिन खुशियाँ, परिवार, संस्कार और उद्देश्य ज़्यादा रखो —क्योंकि यही चीज़ें ज़िंदगी भर साथ रहती हैं।
संपादक : एफ यू खान
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