:भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने रीति संहिता–2025 के तहत नया भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र जारी करते हुए उत्तराखंड को भूकंप जोखिम के मामले में सबसे अधिक संवेदनशील जोन-6 में शामिल किया है। इससे पहले राज्य के जिलों को जोन-4 और जोन-5 में विभाजित किया गया था, लेकिन नई श्रेणीकरण व्यवस्था में पूरे राज्य को उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। यह नया वर्गीकरण हिमालयी राज्यों की भूकंपीय सक्रियता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।वैज्ञानिकों का कहना है कि जोन-6 में शामिल किए जाने से अब उत्तराखंड में सभी तरह के निर्माण कार्यों—चाहे भवन, पुल या अन्य ढांचे—के लिए लोगों को अधिक सतर्क और नियमबद्ध रहना होगा। संरचनाओं के लिए भूकंपरोधी डिजाइन मानकों का पालन पहले से अधिक अनिवार्य और कड़ा हो जाएगा।पहले राज्य दो अलग जोन में थापहले जारी मानचित्र में उत्तराखंड को दो श्रेणियों में रखा गया था—जोन-5 (अत्यधिक संवेदनशील): रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़।जोन-4 (उच्च संवेदनशील): उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल।2021 की रिपोर्ट में भी राज्य के कई शहर संवेदनशीलवर्ष 2021 में लोकसभा में दिए गए एक उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री ने भूकंप खतरे के लिहाज से देश के 38 अत्यधिक संवेदनशील शहरों की सूची जारी की थी। इसमें उत्तराखंड के अल्मोड़ा, नैनीताल, देहरादून और रुड़की भी शामिल थे।नए मानचित्र के लागू होने के बाद विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोगों को निर्माण संबंधी सभी मानकों का कड़ाई से पालन करना चाहिए ताकि संभावित जोखिम को कम किया जा सके।
संपादक : एफ यू खान
संपर्क: +91 9837215263
