काशीपुर। नवदिवसीय श्री राम कथा की अमृत वर्षा के छठे दिन महाराजा अग्रसेन उद्यान में कथा व्यास मानस मर्मज्ञ पूज्य पाद पंडित बृजेश जी पाठक ने श्री राम चरित मानस के अयोध्या कांड के दोहा संख्या 130 की विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि यह दोहा भैया श्री लक्ष्मण जी व श्री हनुमान जी पर पूरी तरह लागू होता है क्योंकि श्री लऽन लाल जी व श्री हनुमान जी दो ऐसे पात्र हैं जो प्रभु श्री राम को सदैव हर प्रकार से अपना स्वामी, सखा, पिता, माता व गुरु मानते हैं। श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने इन दोनों पात्रों के विषय में कई स्थानों पर इस बात का वर्णन किया है और पुष्टि की हैं। पूज्य महाराज जी ने आगे बोलते हुए बताया कि मनुष्य के मन पर छल और कपट का आवरण पड़ा होता है तब भगवान का प्रकृटिकरण नहीं होता। सुंदरकांड में प्रभु श्री राम ने कहा है ‘मोहि कपट छल छिद्र न भावा’ भगवान को निर्मल मन से ही प्राप्त किया जा सकता है कपट छल छिद्र से नहीं। कल श्री राम भक्तों से ऽचाऽच भरे पंडाल में अनेकों अन्य श्रोतागण में से सर्वश्री शंभू शंकर झा, रामकिशोर यादव, राजेश कुमार अग्रवाल, धर्मपाल सिंह चौहान, चौधरी रामकरण सिंह अर्चना सिंह, पंडित कैलाश चंद्र मठपाल, मदन मोहन गोले, राजेंद्र प्रसाद राय, सनत पेगिया एडवोकेट, गोपाल अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, ज्ञानेश कुमार शर्मा, अशोक कुमार अग्रवाल रामनगर, जयप्रकाश योगाचार्य, इंजीनियर दुलार सिंह के नाम विशेष रूप से उल्लेऽनीय हैं। कल आरती व प्रसाद वितरण से पूर्व, धर्म संचालन कर्ता यात्र महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री कृष्ण कुमार अग्रवाल ने बताया कि श्री राम कथा परसों 31 दिसंबर बुधवार को विश्राम लेगी, उन्होंने सभी राम भक्तों से आग्रह किया कि श्री राम कथा श्रवण हेतु निर्धारित समय अपराह्न 3ः30 से 10 मिनट पूर्व आवास विकास स्थित महाराजा अग्रसेन उद्यान में पहुंचने की कृपा करें।
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