अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस पर संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों की मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

काशीपुर। संयुक्त किसान मोर्चा, द्वारा देश के किसानों, मजदूरों और मेहनतकश जनता की समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस के अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए किसानों व मजदूरों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया गया।संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि देश के किसानों ने मजदूरों और मेहनतकश जनता के सहयोग से 13 माह तक ऐतिहासिक आंदोलन चलाया था, जिसके बाद केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। उस दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानून बनाने, बिजली बिल निरस्त करने सहित कई मुद्दों पर सरकार ने वादा किया था, लेकिन आज तक उन वादों को पूरा नहीं किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि सरकार किसानों के खिलाफ बिजली संशोधन विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 जैसे कानून ला रही है, जबकि मजदूरों के विरोध में चार लेबर कोड लागू कर दिए गए हैं। इससे किसानों और मजदूरों की स्थिति और अधिक कमजोर हुई है। मनरेगा योजना को कमजोर कर वीबीआरएमजी योजना लाने से 100 दिन के रोजगार की गारंटी भी समाप्त कर दी गई है।संयुक्त किसान मोर्चा ने याद दिलाया कि किसान आंदोलन के दौरान 736 किसानों ने शहादत दी थी, जिसके बाद एमएसपी पर कानून बनाने का आश्वासन दिया गया था। बावजूद इसके आज भी फसल के दाम एमएस स्वामीनाथन फार्मूले से 20 से 30 प्रतिशत कम हैं। उर्वरकों की बढ़ती कीमत, सब्सिडी में कटौती और कालाबाजारी के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि बीज विधेयक 2025 से बीज बाजार पर कॉरपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नियंत्रण बढ़ेगा, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। वहीं बिजली विधेयक 2025 गरीबों और किसानों के लिए क्रॉस सब्सिडी खत्म करता है।संयुक्त किसान मोर्चा ने बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, आदि वासियों की जमीन छीने जाने, सांप्रदायिक तनाव और महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर भी गहरी चिंता जताई।संयुक्त किसान मोर्चा की प्रमुख मांगें बीज विधेयक 2025 और बिजली संशोधन विधेयक 2025 को रद्द किया जाए। मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड्स वापस लिए जाएं। सभी फसलों के लिए एमएसपी C2+50% के आधार पर कानून बनाया जाए।वीबीआरएमजी अधिनियम 2025 को तुरंत वापस लिया जाए। किसानों के लिए व्यापक कर्ज माफी योजना लागू की जाए। महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर सख्त रोक लगाई जाए।

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संपादक : एफ यू खान

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