अल्मोड़ा। ऑनलाइन खरीद से जुड़े एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती का संदेश देते हुए अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि समय पर उत्पाद की डिलीवरी न करना और आयोग के नोटिस की जानबूझकर अनदेखी करना न केवल सेवा में कमी है, बल्कि यह सीधे तौर पर अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। मामले की सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि विपक्षी कंपनी को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन कंपनी ने उन्हें स्वीकार करने से बचते हुए आयोग की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया। इसे गंभीर मानते हुए आयोग ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए कंपनी पर कुल 40 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया। आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल और सदस्य सुरेश चंद्र कांडपाल ने आदेश दिया कि कंपनी शिकायतकर्ता को 21 मई 2025 से 313 रुपये की मूल राशि आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाएगी। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये का मुआवजा और वाद-व्यय के रूप में 5 हजार रुपये अलग से देने होंगे। वहीं, अनुचित व्यापार व्यवहार अपनाने पर लगाए गए 25 हजार रुपये के अर्थदंड को उपभोक्ता हित संरक्षण कोष में जमा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग के इस फैसले को ऑनलाइन कंपनियों के लिए सख्त चेतावनी माना जा रहा है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है।
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