नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में जारी किए गए नए नियमों के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि इन नियमों में कई महत्वपूर्ण प्रावधान स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किए गए हैं, जिससे इनके गलत इस्तेमाल की संभावना बनी रहती है। पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इन गाइडलाइंस के मसौदे को दोबारा तैयार करे और नियमों को अधिक पारदर्शी, स्पष्ट तथा सहज बनाए, ताकि उनका उद्देश्य सही तरीके से पूरा हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक नए नियमों को स्पष्ट और व्यावहारिक रूप नहीं दिया जाता, तब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में 2012 में लागू ढांचे के अनुसार ही व्यवस्था संचालित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि UGC ने जनवरी 2026 में ‘Equity in Higher Education Institutions Regulations’ जारी किए थे, जिनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों में जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करना तथा छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ के लिए सुरक्षित व सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना बताया गया था। हालांकि नियम जारी होते ही देशभर में यह सवाल उठने लगा था कि जब भेदभाव रोकने के लिए पहले से ही कानून, न्यायालयों के आदेश और संस्थागत शिकायत निवारण प्रणालियां मौजूद हैं, तो नए नियमों की आवश्यकता और उनकी व्यावहारिकता क्या है। इन्हीं आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अस्पष्ट नियमों से न केवल भ्रम की स्थिति बन सकती है, बल्कि उनका दुरुपयोग भी हो सकता है। अदालत के इस आदेश को उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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