काशीपुर। इस समय सूचना का अधिकार का लोग जमकर फायदा उठा रहे हैं जिससे फैक्ट्री एवं उद्योग चलाना कठिन होता जा रहा है। उत्पादन, श्रम कानून, टैक्स और सरकारी नियमों के दबाव के बीच अब एक नई समस्या ने उद्योगपतियों की चिंता बढ़ा दी है। कुछ असामाजिक तत्व सूचना का अधिकार जैसे पवित्र और पारदर्शिता बढ़ाने वाले कानून का दुरुपयोग कर फैक्ट्रियों से अवैध वसूली करने का दबाव बना रहे हैं। ये लोग स्वयं को समाजसेवी बताकर उद्योग प्रबंधन को झूठे और मनगढ़ंत आरोपों में फंसाने की धमकी देते हैं तथा आईटीआई लगाने के नाम पर मानसिक और आर्थिक शोषण करने की कोशिश करते हैं। इसका उद्देश्य न तो जनहित होता है और न ही सामाजिक सुधार, बल्कि केवल निजी स्वार्थ और अवैध लाभ कमाना होता है। उद्योग जगत का कहना है कि ऐसे तथाकथित समाजसेवियों से यह प्रश्न पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने आज तक समाज के लिए क्या योगदान दिया हैµ क्या किसी निर्धन कन्या के विवाह में सहयोग किया? क्या किसी गरीब बच्ची की शिक्षा में मदद की? क्या किसी बीमार जरूरतमंद का इलाज कराया? यदि इन प्रश्नों का उत्तर नकारात्मक है, तो ऐसे लोगों का समाजसेवी कहलाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बनता। उद्योग संचालकों ने प्रशासन से मांग की है कि सूचना का अधिकार जैसे कानून के दुरुपयोग पर सख्त निगरानी रखी जाए और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि ईमानदार उद्योगपति भयमुक्त होकर रोजगार सृजन और विकास में योगदान दे सकें।
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