राजधानी देहरादून में आईएमए के निकट स्थित एक ट्रस्ट की करीब 20 एकड़ भूमि को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए उसकी खरीद–फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं और एहतियातन उक्त भूमि को सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। यह कार्रवाई ट्रस्ट की जमीन को एक विशेष समुदाय को बेचे जाने की शिकायत सामने आने के बाद की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जिन लोगों का नाम इस प्रकरण में सामने आ रहा है, वे पहले भी राज्य में मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्थापित करने की कोशिशों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर राजनीति करती रही है और संवेदनशील मुद्दों पर तुष्टिकरण की नीति अपनाती रही है, जबकि वर्तमान सरकार कानून के दायरे में रहकर पारदर्शी और कठोर निर्णय ले रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की देवभूमि की पहचान, संस्कृति और भू-कानूनों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी तथा यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार पहले से ही भू-माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चला रही है और आगे भी ऐसे तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि उत्तराखंड के भू-कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
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