राजधानी देहरादून में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हुए हमले की घटना ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। आरोप है कि रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा उर्फ काऊ अपने समर्थकों के साथ शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे। यहां एक अशासकीय विद्यालय का नाम बदलने को लेकर निदेशक के साथ उनकी कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट और तोड़फोड़ में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गहमा-गहमी के दौरान समर्थकों ने कार्यालय में जमकर हंगामा किया और निदेशक पर कुर्सियां तक फेंकीं, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी दहशत में आ गए।बताया जा रहा है कि निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने विधायक को स्पष्ट किया था कि स्कूल का नाम बदलने की प्रक्रिया शासन स्तर पर तय होती है और संबंधित फाइल सचिव शिक्षा को भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद विधायक और उनके समर्थक शांत होने को तैयार नहीं हुए। इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि क्या जनप्रतिनिधियों को शासन की प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी है या नहीं।हमले में घायल निदेशक अजय कुमार नौडियाल को तत्काल कोरोनेशन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है।इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और आरोप लगाया है कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि ही यदि इस तरह की घटनाओं में शामिल होंगे तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक गरिमा पर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।वहीं प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। राजधानी में हुई इस सनसनीखेज घटना ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है तथा आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।
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