काशीपुर। फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के विरोध में यादव समाज के सैकड़ो लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि फिल्म के जरिए यादव समाज को ‘लव जिहाद’ जैसे संवेदनशील और विवादित मुद्दे से जोड़कर सुनियोजित तरीके से बदनाम करने की कोशिश की गई है।आक्रोशित भीड़ ने फिल्म के निर्माता संदीप तोमर और निर्देशक अंकित भड़ाना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से फिल्म पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनका कहना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी समाज को नकारात्मक और षड्यंत्रकारी रूप में दिखाना सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यादव समाज का इतिहास देशभक्ति, बलिदान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहा है। ऐसे में फिल्म के कथानक और प्रस्तुतिकरण के माध्यम से समाज की छवि को संदिग्ध रूप में दिखाना अस्वीकार्य है। वक्ताओं ने सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस आधार पर ऐसी फिल्म को अनुमति दी गई, जो समाज में वैमनस्य बढ़ा सकती है। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यादव समाज का इतिहास देशभक्ति, बलिदान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहा है। ऐसे में फिल्म के कथानक और प्रस्तुतिकरण के माध्यम से समाज की छवि को संदिग्ध रूप में दिखाना अस्वीकार्य है। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि फिल्म पर रोक नहीं लगाई गई, तो आंदोलन काशीपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशव्यापी स्वरूप ले सकता है। ज्यादा समाज के प्रमुख वक्ताओं ने कहा कि “सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज की प्रतिष्ठा दांव पर लगाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने निर्माता निर्देशक से सार्वजनिक माफी की भी मांग की। विवाद की गंभीरता को देखते हुए समाज के प्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। उनका आरोप है कि कुछ व्यावसायिक ताकतें लाभ कमाने के लिए जानबूझकर ऐसे विषय चुनती हैं, जिनसे समाज की भावनाएं आहत होती हैं। इस उग्र प्रदर्शन ने एक बार फिर ‘अभिव्यक्ति की आजादी बनाम सामाजिक जिम्मेदारी’ की बहस को हवा दे दी है।













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