देहरादून। राज्य में उद्योग स्थापना प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब नारंगी और हरी श्रेणी के उद्योगों के स्थलीय निरीक्षण एवं सत्यापन का कार्य थर्ड पार्टी के माध्यम से कराया जा सकेगा, जिसके आधार पर पीसीबी द्वारा एनओसी जारी की जाएगी। यह प्रस्ताव पीसीबी की बोर्ड बैठक में पारित हो गया है।अब तक औद्योगिक इकाइयों को स्थापना और संचालन से पहले पीसीबी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होता था और निरीक्षण की पूरी प्रक्रिया बोर्ड के सीमित संसाधनों पर निर्भर रहती थी। राज्य में पीसीबी के केवल चार क्षेत्रीय कार्यालय हैं और कर्मचारियों की कमी भी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। ऐसे में कामकाज को सुचारु बनाने और उद्योगों की स्थापना में तेजी लाने के लिए थर्ड पार्टी सहयोग का निर्णय लिया गया है।इन श्रेणियों पर लागू होगा नया नियमनिर्णय के अनुसार नारंगी श्रेणी (जैसे दवा निर्माण इकाइयां, होटल-रेस्तरां आदि) और हरी श्रेणी (जैसे हल्की इंजीनियरिंग इकाइयां, इलेक्ट्रॉनिक सामान असेंबली आदि) के लिए स्थलीय निरीक्षण अब बाहरी विशेषज्ञ संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए पीसीबी द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम देहरादून, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से सहयोग लिया जाएगा। इन संस्थानों के विशेषज्ञ इकाइयों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद अंतिम एनओसी पीसीबी द्वारा जारी की जाएगी।क्षेत्रीय कार्यालयों को मिली अतिरिक्त शक्तिपीसीबी ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकार भी बढ़ा दिए हैं। पहले क्षेत्रीय कार्यालय केवल पांच करोड़ रुपये तक की हरित श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को अनुमति दे सकते थे, जबकि इससे अधिक लागत वाली इकाइयों की फाइल मुख्यालय भेजनी पड़ती थी। अब क्षेत्रीय कार्यालयों को 10 करोड़ रुपये तक की औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और संचालन की अनुमति देने का अधिकार मिल गया है। इससे उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया और अधिक तेज होने की उम्मीद है।हालांकि, स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, इंडक्शन फर्नेस और रेलिंग से संबंधित इकाइयों की अनुमति पहले की तरह पीसीबी मुख्यालय से ही जारी होगी।पीसीबी अध्यक्ष एवं प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु ने बताया कि चयनित श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण में थर्ड पार्टी व्यवस्था लागू होने से कार्यप्रणाली में गति आएगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।












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