देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने यह बात ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में अग्निवीरों के रूप में भर्ती होने वाले कैडेट्स के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान कही।संवाद के दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जानकारी ली। कैडेट ओपी कंडारी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि अग्निवीर के रूप में सेवा पूरी करने के बाद सरकार उनके रोजगार की क्या व्यवस्था कर रही है। इस पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने पुलिस सहित अन्य वर्दीधारी राज्यस्तरीय बलों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा केंद्र सरकार भी अग्निवीरों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठा रही है।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हर अग्निवीर के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि देश की सेवा करने वाले युवाओं को आगे बढ़ने के लिए हर संभव अवसर मिलना चाहिए और राज्य सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।संवाद कार्यक्रम के दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत जीवन और अनुभवों से जुड़े प्रश्न भी किए। जब एक कैडेट ने पूछा कि एक सैनिक के बेटे होने के बावजूद क्या उन्होंने कभी सेना में भर्ती होने के बारे में नहीं सोचा, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने पिता के साथ रहते हुए सेना के अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को बहुत करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि जिस भावना से हमारे सैनिक देश की रक्षा करते हैं, उसी भावना से वह प्रदेश के “मुख्य सेवक” के रूप में उत्तराखंड की जनता की सेवा करने का प्रयास कर रहे हैं।एक अन्य कैडेट हिमांशु रौतेला ने मुख्यमंत्री से पूछा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के बावजूद वह अपने परिवार को कैसे समय दे पाते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ही उनका परिवार है और उत्तराखंड का हर गांव उनका अपना गांव है। इसलिए वह पूरे प्रदेश को अपने परिवार की तरह मानते हैं।संवाद के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उनकी पहचान “धाकड़ धामी” के रूप में क्यों बनी, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का व्यवहार जनता के साथ हमेशा सौम्य होना चाहिए, लेकिन राज्यहित और जनहित में कई बार कठोर और साहसिक निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। इसके अलावा प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून भी लागू किए गए हैं, जो सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाते हैं।एक अन्य प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की जनता के आशीर्वाद से उन्हें लगातार ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है, जिसके कारण उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास को नई गति देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।इससे पहले अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना तेजी से आत्मनिर्भर बन रही है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और भारतीय सेना वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और सक्षम सेना के रूप में स्थापित हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने अग्निवीर कैडेट्स से अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान भी किया।
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