सुल्ताना डांकू का काशीपुर के चैती मेले के नखासा बाजार से था विशेष संबंध

काशीपुर। क्या आपको पता है 20वीं सदी के डाकू सुल्ताना, फूलन देवी, डाकू मलखान, जैसे कुख्यात डाकुओं का काशीपुर से क्या नाता रहा है.. आज हम आपको बताते हैं कि इन सभी कुख्यात डाकुओं का काशीपुर से नाता विशेष रहा है क्योंकि मां बाल सुंदरी देवी के मंदिर पर सैकड़ो वर्षों से चैती मेला लगता चला आ रहा है.. चैती मैले की शुरुआत विशेष नखासा बाजार लगने के बाद होती है..इस बाजार मे विभिन्न प्रकार की प्रजातियों के घोड़े बिकने आते हैं ऐसी किवदंती है कि सैकड़ो वर्ष पूर्व सुल्ताना डाकू, डाकू मलखान तथा फूलन देवी जैसे कुख्यात डाकू इस नखासा बाजार में विशेष कर घोड़े खरीद कर अपने लिए लेकर जाते थे तब से यह नख़ासा बाजार लगता चल रहा है..इस बाजार मे लाखो की कीमत के घोड़े बिकने के लिये आते है। आपको बता दे की उत्तर भारत का सुप्रसिद्ध चैती मेला मां भगवती बाल सुंदरी देवी मंदिर परिसर में सैकड़ो वर्ष पूर्व से ही लगता चला आ रहा है और यह मंदिर उत्तराखंड के जनपद उधम सिंह नगर के काशीपुर के कुंदेश्वरी रोड पर स्थित है ये ऐतिहासिक चैती मेला चैत्र मास यानी ( मार्च से अप्रैल के मध्य की नवरात्रि में आयोजित किया जाता है। और लगभग मेला 15 दिन तक चलता है.. मेले की शुरुआत में इस नखासा बाजार में विभिन्न प्रकार की प्रजापति के घोड़े बिकने के लिए आते हैं और खरीदार अपने मनपसंद के घोड़े खरीद कर यहां से लेकर जाते हैं..इस बाजार में घोड़ा व्यापारी पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, पंजाब आदि से घोड़े बेचने आते हैं और यहां बिक्री करके अपने घोड़े की अच्छी कीमत वसूलकर जाते हैं। इस बार भी यह बाजार अपने पूरे शबाब पर है। खरीददार यहां घोडों को दौडाकर व उनके करतब देखकर सही तरीके से जांच परखकर घोडे खरीदते हुए देख सकते हैं। इस बार इस घोड़ा बाजार में सिन्धी, अरबी, मारवाडी तथा अवलक सहित, अमृतसरी, वल्होत्रा, नुखरा, अफगानी हर प्रजाति के घोडे आये हैं। यहां लुधियाना व पंजाब और राजस्थान से लाए घोडों की काफी डिमांड खरीददार करते हैं। काशीपुर के मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में लगने वाले इस चैती मेले में हर साल लगने वाले नखासा बाजार का अनुमान इसी से ही लगाया जा सकता है कि अपने समय का मशहूर डाकू सुल्ताना डाकू भी अपने लिए इसी नखासा बाजार से घोडा खरीदकर ले जाता था। इस बाजार में 10-12 नस्ल के घोड़े बिकने आते हैं। मेले के नखाशा बाजार में उत्तराखंड, यूपी समेत कई प्रदेशों से लोग घोड़े खरीदने आते हैं। इस घोड़ा बाजार को 135 से 140 साल हो गए हैं। पूर्व में यह घोड़ा बाजार पूरे भारत मे अपना महत्व रखता था। यहां पूरे भारत से व्यापारी और खरीददार आते थे। यहां तक कि मेरठ, बाबूगढ़ छावनी, रानीखेत छावनी और गौशाला तक से घोड़े खरीदने आते थे। वहीं इन बाजार में एक से एक अच्छी नस्ल के घोड़े आते थे। तब यहां उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, काठियावाड़ तथा राजस्थान से आते थे। आज से 45 साल पहले तक अधिकतर नस्लों के घोड़े बिक्री के लिए आते थे लेकिन अब चंद नसलें ही रह गयी हैं जिनमें सिंधी, पंजाबी और काठियावाडी शामिल हैं। सुल्ताना डाकू के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि उस जमाने में अधिकारियों के साथ-साथ डाकू भी घोड़े रखते थे और आम इंसान की जरूरत घोड़ों से ही पूरी होती थी, घोड़ों से ही आम आदमी इधर से उधर जाया करता था। बताया जाता है कि उन्होंने बताया कि सुल्ताना डाकू का यही क्षेत्र था और यहीं से ही मिस्टर यंग नामक अंग्रेज अधिकारी ने उन्हें गिरफ्तार किया था तथा सुल्ताना डाकू कई साल तक इस मेले में आया और यहां से घोड़ा भी लेकर गया। सुल्ताना डाकू उस वक्त का बहुत ही प्रसिद्ध व्यक्ति था। अंग्रेजी हुकूमत पूरी तरह से उसके पीछे पड़ गई थी। ब्रिटेन से मिस्टर यंग नामक अंग्रेज अधिकारी को उसे गिरफ्तार करने के लिए विशेष तौर पर बुलाया गया था और सुपरीटेंडेंट कासम अली को सुल्ताना डाकू को गिरफ्तार करने के लिए उसके पीछे लगाया गया था। वहीं ऐसा माना जाता है कि अपने समय की मशहूर महिला डाकू फूलन देवी भी इन मेले में आती थी और इसने यहां पर मां बाल सुंदरी देवी को के मंदिर में प्रसाद भी चढ़ाया था तो यहां से घोड़ा भी खरीदा था। वही इस बार काशीपुर में 19 मार्च से शुरू हुआ चैती मेला धीरे धीरे अब अपनी गति पकड़ने लगा है चैती मेले में हर साल की तरह इस बार भी घोड़ा बाजार लगा है जो इस बार काफी सूना दिखाई दे रहा है। इस बार घोड़ा व्यापारी और घोड़ों के खरीददार कम संख्या में मेले में पहुंचे हैं। घोड़ा खरीदार घोड़ों को दौड़ाकर व उनके करतब देखकर ही खरीदते हैं। इस बार काशीपुर में सबसे महंगा घोड़ा 10 लाख रुपए की कीमत का है जो की काशीपुर के कुंडा क्षेत्र के ग्राम बैतवाला निवासी सरनजीत सिंह लाए हैं ।

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संपादक : एफ यू खान

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