रादून। देहरादून की अदालत ने नाबालिग बेटी के साथ लंबे समय तक गंभीर आपराधिक कृत्य करने के दोषी एयरफोर्स कर्मी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने अपने फैसले में इस मामले को अत्यंत गंभीर और विकृत मानसिकता से जुड़ा बताते हुए कहा कि इस तरह के अपराध बच्चों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास को गहरे स्तर पर नुकसान पहुंचाते हैं और समाज के लिए अत्यंत घातक हैं। न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, आरोपी ने वर्षों तक बेटी के साथ अमानवीय व्यवहार किया, जिसकी शुरुआत उसके बाल्यकाल में हुई और यह सिलसिला किशोरावस्था तक चला। पीड़िता के दो छोटे भाई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, जिनमें एक विशेष आवश्यकता वाला बच्चा है और दूसरा रक्त संबंधी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक निर्भरता के चलते मां और बेटी लंबे समय तक चुप रहीं। 17 नवंबर 2023 को पीड़िता ने साहस जुटाकर पूरी घटना की जानकारी अपनी मां को दी, जिसके बाद मामला पुलिस और न्यायालय तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष द्वारा मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दिए गए तर्कों को अदालत ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही पूर्णतः विश्वसनीय है और कोई भी संतान अपने अभिभावक पर ऐसे गंभीर आरोप बिना ठोस कारण के नहीं लगाएगी। विशेष न्यायाधीश अर्चना सागर की अदालत ने कहा कि समय के साथ पीड़िता को अपने साथ हो रहे कृत्यों की गंभीरता का बोध हुआ और न्यायालय का यह दायित्व है कि ऐसे अपराधों पर कठोरतम संदेश दिया जाए।
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