काशीपुर। कुमायूँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (केजीसीसीआई) के अध्यक्ष पवन अग्रवाल द्वारा अवगत कराया गया है कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा आज 7 फरवरी, 2026 को बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि थे तथा श्री आर के सुधांशु, अपर मुख्य सचिव, श्री दिलीप जावलकर, प्रमुख सचिव वित्त, श्री बीवीआरसी पुरुषोत्तम, सचिव सहकारिता, श्री धीरज गर्व्याल, सचिव पर्यटन, श्री दीपक रावत, आयुक्त कुमाऊँ मण्डल तथा श्री दीपक बाली, मेयर काशीपुर भी उपस्थित थे।इस अवसर पर श्री पवन अग्रवाल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु जारी होने वाले राज्य बजट में शामिल करने हेतु विभिन्न सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमन्त्री जी के अथक प्रयासों से यूरोपियन यूनियन के साथ एक बहुत अच्छा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है, जिससे उम्मीद है कि हमारी आर्थिक प्रगति को एक नई रफ्तार मिलेगी। इसके अतिरिक्त अमेरिका के साथ हुई डील से भी हमारी अर्थव्यवस्था की प्रगति में और अधिक वृद्धि होगी। उपरोक्त दोनों संधियों का लाभ निश्चित तौर पर हमारे राज्य उत्तराखण्ड को भी मिलेगा।रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास: आगामी बजट में राज्य की सड़कों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। सड़कों का निर्माण केवल मरम्मत तक सीमित न होकर चौड़ीकरण एवं उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यातायात को सुचारु रूप से संभाला जा सके। प्रदेश में कुछ सड़क मार्ग अत्यंत जर्जर अवस्था में हैं, विशेष रूप से काशीपुर- ठाकुरद्वारा- मुरादाबाद, काशीपुर-बाजपुर-मुरादाबाद एवं काशीपुर-रामनगर मार्ग, जिन पर पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों का आवागमन अधिक रहता है। अतः इन सड़कों के शीघ्र निर्माण हेतु बजट में समुचित प्रावधान किया जाना आवश्यक है।लॉजिस्टिक/ट्रांसपोर्ट पॉलिसी का निर्धारण: वर्तमान में पश्चिमी राज्यों में माल भेजने पर 10-15% तथा दक्षिणी राज्यों में 12-18% तक लॉजिस्टिक लागत आती है। इसे कम करने के लिए राज्य में प्रभावी लॉजिस्टिक नीति बनाई जाए, जिससे यह लागत लगभग 5% कम हो सके। अतः इस बजट में लॉजिस्टिक, ट्रांसपोर्ट एवं वेयरहाउसिंग नीति के लिए प्रावधान किया जाना चाहिए।अतिरिक्त ऊर्जा क्रय की आवश्यकता एवं पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास: राज्य में विद्युत पारेषण एवं वितरण अवसंरचना पुरानी होने के कारण उद्योगों को बार-बार बिजली कटौती, वोल्टेज फ्लक्चुएशन एवं फॉल्ट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मामूली खराबी पर भी फीडर एवं सब-स्टेशन में फॉल्ट आ जाने से उत्पादन प्रभावित होता है। उद्योगों में स्थापित अत्याधुनिक मशीनें वोल्टेज एवं पावर ट्रिपिंग के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। अतः इन समस्याओं के समाधान हेतु बजट के माध्यम से अतिरिक्त ऊर्जा क्रय एवं पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण की नितांत आवश्यकता है। सुझाव दिया गया कि राज्य के संपूर्ण पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर का किसी सक्षम एजेंसी से तकनीकी ऑडिट कराया जाए तथा उसके आधार पर पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक एवं सुदृढ़ बनाने की कार्ययोजना तैयार की जाए। बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए यूपीसीएल को बाजार से बिजली क्रय की पूर्व-निश्चित व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि उद्योगों को महंगी बिजली बाहर से न खरीदनी पड़े। उत्तराखंड पर्यटन उद्यमी प्रोत्साहन योजना, 2024: इस योजना के अंतर्गत पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने हेतु नीति में सुधार की आवश्यकता है। वर्तमान में कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी को 10 वर्षों में विभाजित किया गया है। सुझाव है कि इसे 10 वर्षों के बजाय पहले 3 वर्षों में ही उद्योगों को प्रदान किया जाए।उद्योगों के लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी का प्रावधान: राज्य में बंद की गई ट्रांसपोर्ट सब्सिडी को पुनः शुरू करने की आवश्यकता है। पूर्व में इसके दुरुपयोग की शिकायतों के कारण इसे बंद किया गया था, लेकिन अब आधुनिक तकनीक एवं इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के माध्यम से इसे सुरक्षित रूप से लागू किया जा सकता है। सरकार को सुझाव है कि दूरी के आधार पर उद्योगों को लगभग 25% ट्रांसपोर्ट सब्सिडी प्रदान की जाए। टैक्स एवं सेस का न्यायसंगत निर्धारण: जीएसटी लागू करते समय कहा गया था कि जीएसटी एकमात्र टैक्स होगा, लेकिन वर्तमान में उद्योगों पर कई अतिरिक्त सेस लगाए जा रहे हैं। विशेष रूप से सेन्ट्रल गवर्नमेंट के ग्राउंड वाटर सेस के समान राज्य में भी वाटर सेस लगाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह सेस बहुत कम है। मांग है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर राज्य में भी कम एवं न्यायसंगत सेस लागू किया जाए।मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर में सुधार: उत्तराखंड के कृषि उद्योगों को कच्चा माल बाहरी राज्यों से मंगाना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। उत्तर प्रदेश में मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर 1.5% है, जबकि उत्तराखंड में यह 2.5% है। सुझाव है कि जो उद्योग अन्य राज्यों में शुल्क देकर कच्चा माल लाते हैं, उन पर राज्य में पुनः मण्डी शुल्क न लगाया जाए।BOCW अधिनियम, 1996 के तहत श्रमिक उपकर की मांग: राज्य के औद्योगिक प्रतिष्ठानों को बिल्डिंग एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 के अंतर्गत भारी मांग के नोटिस दिए जा रहे हैं। तर्क यह है कि जो इकाइयाँ फैक्ट्री अधिनियम, 1948 के तहत पंजीकृत होकर उत्पादन प्रारंभ कर देती हैं, वे स्वतः ही BOCW अधिनियम की ‘निर्माण कार्य’ की परिभाषा से बाहर हो जाती हैं, अतः उन पर यह उपकर नहीं लगाया जाना चाहिए।उक्त कार्यक्रम में केजीसीसीआई अध्यक्ष श्री पवन अग्रवाल के साथ महासचिव श्री नितिन अग्रवाल भी उपस्थित थे।
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