देहरादून। मुख्यमंत्री धामी राज्य के विकास, विरासत संरक्षण, सुशासन और डेमोग्राफिक बदलाव से जुड़े मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठा रहे हैं। वे विभिन्न मंचों से घुसपैठ, अतिक्रमण और कानून-व्यवस्था जैसे संवेदनशील विषयों पर भी खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री एक ओर जहां विकास कार्यों को अपनी सरकार की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वैचारिक मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाकर राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। इसे 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें विकास और विचारधारा दोनों को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई जा रही है।प्रदेश में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। नए प्रदेश अध्यक्ष के आने के बाद कांग्रेस संगठन में तेजी दिखाई दे रही है, जिससे सत्तारूढ़ दल भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दोनों प्रमुख दल अभी से चुनावी मुद्दों को तय करने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री डेमोग्राफिक बदलाव, तुष्टिकरण, सुशासन और देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाए रखने जैसे विषयों पर लगातार जोर दे रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में ये मुद्दे राजनीति के केंद्र में रहेंगे।सरकार अपने कार्यकाल में नकल विरोधी कानून और दंगा विरोधी कानून जैसे कदमों को भी सुशासन की दिशा में उठाए गए बड़े फैसलों के रूप में प्रस्तुत करती रही है। इन कानूनों के जरिए सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। खासकर युवाओं और आम जनता के बीच इन फैसलों को सरकार की सख्त छवि से जोड़कर देखा जा रहा है।इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को एक मजबूत और निर्णायक वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है। स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के जरिए बड़ी संख्या में लोग सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं। सरकार की रणनीति इन योजनाओं के दायरे को और बढ़ाकर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की है, ताकि इसका सीधा राजनीतिक लाभ भी मिल सके।धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर भी सरकार के प्रयासों को अहम माना जा रहा है। चारधाम यात्रा मार्गों के सुधार के साथ-साथ कई प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण व सौंदर्यीकरण का काम किया गया है। इन परियोजनाओं को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के रूप में पेश किया जा रहा है। जनता के एक बड़े वर्ग में इसे सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे सरकार को सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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