रामनगर। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क इस बार पर्यटकों की अपेक्षाकृत कम संख्या और घटते राजस्व के कारण चर्चा में है। हर साल लाखों सैलानियों से गुलजार रहने वाला देश का यह प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थल वित्तीय वर्ष 2025-26 में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुटा सका। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई ठोस कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख सफारी शुल्क में वृद्धि को माना जा रहा है। वरिष्ठ नेचर गाइड संजय छिमवाल के अनुसार बढ़ी हुई फीस के कारण खासकर मध्यम वर्ग के पर्यटक अब कॉर्बेट आने से बच रहे हैं और अपने यात्रा बजट को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं। इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली भी पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है, जहां लोकप्रिय ढिकाला जोन में समय पर बुकिंग न मिलने से लोग निराश होकर अन्य विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।दूसरी ओर, कॉर्बेट के आसपास विकसित हो रहे नए पर्यटन क्षेत्र जैसे सीताबनी और फाटो जोन भी मुख्य पार्क के लिए चुनौती बनकर उभरे हैं। इन क्षेत्रों में बेहतर टाइगर साइटिंग, आसान बुकिंग प्रक्रिया और नाइट स्टे जैसी सुविधाएं पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। सोशल मीडिया पर इन जगहों का तेजी से बढ़ता प्रचार भी उनकी लोकप्रियता को बढ़ा रहा है। वहीं, ट्रैवल एजेंटों की रणनीति भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रही है, जहां कई एजेंट कॉर्बेट के नाम पर पैकेज बेचकर पर्यटकों को अपेक्षाकृत सस्ते वैकल्पिक जोनों में भेज देते हैं, जिससे उनका मुनाफा बढ़ता है। कुल मिलाकर, बढ़ती लागत, बुकिंग की जटिलताएं और नए विकल्पों की उपलब्धता के कारण कॉर्बेट में पर्यटकों की संख्या पर असर साफ नजर आ रहा है, जो पर्यटन प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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