काशीपुर। नगर क्षेत्र में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, हर वर्ष किताबों और ड्रेस में बदलाव, आरटीई सीटों में पारदर्शिता और स्कूलों की मनमानी जैसे मुद्दों को लेकर अभिभावकों में नाराजगी दिनो-दिन बढ़ती जा रही है। खड शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र कुमार साहू ने कहा कि कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों को किसी खास दुकान, प्रकाशक या विद्यालय से ही किताबें, कॉपियां या ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि हाल ही में रुद्रपुर में निजी विद्यालय प्रबंधन के साथ हुई बैठक में यह साफ निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही पठन-पाठन कराया जाए। जिन विषयों की किताबें एनसीईआरटी से उपलब्ध नहीं हैं, वहां समकक्ष और उचित मूल्य वाली पुस्तकें ही लागू की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से एक विस्तृत एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की जा चुकी है, जिसे काशीपुर क्षेत्र के सभी निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों को भेज दिया गया है। खंड शिक्षा अधिकारी ने ड्रेस को लेकर कहा कि कोई भी स्कूल हर वर्ष बिना पूर्व सूचना के ड्रेस नहीं बदल सकता। यदि किसी विद्यालय को ड्रेस बदलनी है तो उसे पहले अभिभावकों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक अधिकृत दुकान से ही ड्रेस खरीदने का दबाव बनाना नियमों के विरुद्ध है। आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों से किसी भी प्रकार की फीस वसूली पर भी उन्होंने साफ रुख अपनाते हुए कहा कि आरटीई के अंतर्गत आने वाले बच्चों को निशुल्क शिक्षा देना अनिवार्य है और इस श्रेणी में किसी भी प्रकार का शुल्क लेना नियम विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि आरटीई के तहत विद्यालयों में लोअर क्लास में पिछले तीन वर्षों के औसत प्रवेश का 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर जिले में बेहतर स्तर पर काम हुआ है। फीस बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने कहा कि अभी तक विभाग को कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन यदि कोई शिकायत आती है, तो उस पर जांच होगी। यदि किसी मामले में गंभीरता पाई जाती है तो उसे तत्काल मुख्य शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग के नियम और निर्देश सभी निजी विद्यालयों पर लागू होते हैं और उनका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। यदि किसी भी स्कूल द्वारा एसओपी या नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि काशीपुर खंड में लगभग 350 विद्यालय संचालित हैं। इनमें सरकारी और निजी दोनों तरह के विद्यालय शामिल हैं। इस क्षेत्र में करीब 90 प्राथमिक विद्यालय, 25 राजकीय प्राथमिक विद्यालय, 25 जूनियर हाई स्कूल, मान्यता प्राप्त विद्यालयों के अलावा हाईस्कूल और इंटर कॉलेज भी संचालित हैं।
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