यूपीसीएल को वित्तीय वर्ष 2026-27 में विद्युत दरें बढ़ाने के लिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए -पवन अग्रवाल

काशीपुर। कुमायूँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई) के अध्यक्ष, पवन अग्रवाल द्वारा अवगत कराया गया कि बीते 23 फरवरी, 2026 को उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग यूईआरसी द्वारा उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन यूपीसीएल द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु प्रस्तावित विद्युत टैरिफ वृद्धि के संबंध में विद्युत उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया एवं सुझाव आमंत्रित किए जाने के उद्देश्य से विकास भवन, ऊधम सिंह नगर के सभागार में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जनसुनवाई में यूईआरसी के चेयरमैन, एमएल प्रसाद, मेंबर टेक्निकल, प्रभात किशोर डिमरी, मेंबर (लॉ), अनुराग शर्मा, डायरेक्टर, फाइनेंस, दीपक पाण्डेय, सचिव, नीरज सती एवं यूईआरसी व यूपीसीएल के विभिन्न अधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर केजीसीसीआई की पावर सब-कमेटी के चेयरमैन, शकील अहमद सिद्दीकी ने कहा कि यूपीसीएल द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु लगभग 16 प्रतिशत से अधिक की प्रस्तावित विद्युत दर वृद्धि उद्योगों पर गंभीर आर्थिक प्रभाव डालेगी। उद्योग पहले से ही कच्चे माल, परिवहन एवं अन्य परिचालन लागतों के बढ़ते दबाव से जूझ रहे हैं, ऐसे में विद्युत दरों की वृद्धि से उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि उद्योग राज्य के विद्युत राजस्व में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं, फिर भी लगातार बढ़ती दरें उनकी लाभप्रदता और निवेश योजनाओं को कमजोर कर रही हैं। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में विद्युत दरों की तुलनात्मक स्थिरता के कारण वहां के उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल रहा है, जबकि उत्तराखण्ड में निरंतर बढ़ती बिजली की दरों से औद्योगिक पलायन की आशंका बढ़ रही है। उच्च दरों एवं विभिन्न अधिभारों के चलते उद्योग वैकल्पिक ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे वितरण प्रणाली के राजस्व पर भी प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही वोल्टेज एवं लोड आधारित टैरिफ लागू न होने से उच्च वोल्टेज उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि प्रस्तावित वृद्धि पर पुनर्विचार कर संतुलित एवं वहनीय दर संरचना सुनिश्चित की जाए।चैम्बर के निवर्तमान अध्यक्ष, अशोक बंसल ने कहा कि यूपीसीएल द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उपभोक्ताओं से कहा गया था कि स्मार्ट मीटर लगने से विद्युत बिलों में कमी आएगी, स्मार्ट मीटरों को प्री-पेड मीटर में कन्वर्ट कर दिया जाएगा तथा ऐप पर स्मार्ट मीटरों के बिल की पूरी डिटेल उपलब्ध कराई जाएगी। यूपीसीएल द्वारा इनमें से कोई भी वादा अभी तक पूरा नहीं किया गया है। जब से स्मार्ट मीटर लगे हैं, तब से उद्योगों के बिल बहुत ज्यादा बढ़े हुए आ रहे हैं, जिससे उद्योगों को अत्यधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी उक्त मीटरों में कोई सुधार नहीं किया गया है।उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती विद्युत दरें राज्य की औद्योगिक नीतियों के विपरीत हैं, जिनका उद्देश्य निवेश को आकर्षित करना एवं उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। यदि विद्युत दरों में इस प्रकार की वृद्धि को लागू किया जाता है, तो इससे राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर होगी तथा नए निवेशकों के लिए उत्तराखण्ड में पूंजी निवेश के प्रति आकर्षण कम होगा। उन्होंने चेयरमैन, यूईआरसी से आग्रह किया कि राज्य में रोजगार, सरकारी एवं यूपीसीएल के राजस्व तथा औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए यूपीसीएल को वित्तीय वर्ष 2026-27 में विद्युत दरें बढ़ाने के लिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस अवसर पर चैम्बर के निवर्तमान अध्यक्ष, अशोक बंसल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, रमेश कुमार मिड्ढा, पावर सब-कमेटी के चेयरमैन, अधिवक्ता शकील अहमद सिद्दीकी, संजय कुमार अदलखा, सुशील कुमार तुलस्यान आदि उपस्थित थे।

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