आरक्षित वन भूमि आवंटन की जांच तेज, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उत्तराखंड में SIT का गठन

देहरादून। आरक्षित वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग के मामलों को लेकर उत्तराखंड सरकार ने सख्त कदम उठाया है। Supreme Court of India के निर्देशों के अनुपालन में राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में विशेष जांच टीमों (SIT) का गठन कर दिया है, जो यह जांच करेंगी कि कहीं आरक्षित वन भूमि निजी संस्थाओं को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए आवंटित तो नहीं की गई है।दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष मई में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए थे कि वे इस प्रकार के मामलों की विस्तृत जांच कराएं। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि वन भूमि का गलत तरीके से आवंटन पाया जाता है, तो उसका कब्जा वापस लेकर संबंधित भूमि को वन विभाग को सौंपा जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में भूमि वापस लेना व्यापक जनहित में संभव न हो, तो संबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं से भूमि की कीमत वसूल की जाए और उस राशि का उपयोग वनों के विकास और संरक्षण के लिए किया जाए।इन्हीं निर्देशों के तहत उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी के बाद राजस्व विभाग के अधीन ऐसी सभी संदिग्ध वन भूमि की जांच के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में SIT का गठन किया गया है। ये टीमें संबंधित मामलों की गहराई से जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वन संपदा का दुरुपयोग न हो।सरकार के इस कदम को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। इससे न केवल अवैध आवंटनों पर रोक लगेगी, बल्कि राज्य में वन संपदा के संरक्षण और सतत विकास को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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संपादक : एफ यू खान

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