देहरादून। प्रदेश में संबंधित क्षेत्र के विकास और निगरानी के उद्देश्य से गठित आयोग की स्थापना को 16 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी आयोग का पूर्ण प्रशासनिक ढांचा तैयार नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि आयोग के पास आज तक अपना स्थायी स्टाफ तक उपलब्ध नहीं है और कामकाज चलाने के लिए पशुधन विभाग के कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के कारण आयोग की कार्यप्रणाली लगातार प्रभावित हो रही है, जिससे कई महत्वपूर्ण कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।जानकारी के अनुसार, आयोग के लिए अलग ढांचा तैयार करने और आवश्यक पद सृजित करने का प्रस्ताव काफी पहले शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त स्टाफ और संसाधन न होने के बावजूद आयोग अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की पूरी कोशिश कर रहा है। सीमित संसाधनों में कार्य संचालन करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, जिसके कारण कई योजनाओं और निरीक्षण संबंधी कार्यों पर असर पड़ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आयोग के प्रभावी संचालन के लिए मजबूत प्रशासनिक ढांचा और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। यदि समय रहते आयोग को पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए, तो इसके उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं, आयोग से जुड़े लोगों ने शासन से जल्द आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान कर ढांचा मजबूत करने की मांग की है, ताकि आयोग अपने कार्यों को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से संचालित कर सके।
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