उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भीमताल के जोन स्टेट क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वन विभाग की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी प्रकार के पेड़ों का पातन नहीं किया जाएगा और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा।मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष हुई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जोन स्टेट क्षेत्र में कई लोगों द्वारा वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि इन निर्माण कार्यों के लिए न तो संबंधित विभागों से अनुमति ली गई और न ही पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त की गई है।याचिका में यह भी कहा गया कि विकास गतिविधियों के नाम पर भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। आरोप है कि इन गतिविधियों के लिए न वन विभाग से अनुमति ली गई और न ही पर्यावरण विभाग से कोई स्वीकृति प्राप्त की गई, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और स्पष्ट संकेत दिए कि पर्यावरण एवं वन भूमि से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब अदालत के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि जोन स्टेट क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
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