काशीपुर में “ऊपरी” विकास या जनता का शोषण?

काशीपुर l में विकास कार्यों को लेकर हालात अब सीधे तौर पर सवालों के घेरे में हैं, जहां लगातार काम के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।क्या वजह है कि काम के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं?शहर में बार-बार निर्माण और मरम्मत के दावे होते हैं, लेकिन उनका असर ज्यादा समय तक नजर नहीं आता, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या काम सिर्फ दिखावे के लिए किया जा रहा है।क्या जनता के पैसों का सही इस्तेमाल हो रहा है?करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम नागरिक को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा, ऐसे में यह चिंता गहराती जा रही है कि कहीं यह पूरा सिस्टम जनता के साथ अन्याय तो नहीं कर रहा।क्या यह सीधे-सीधे जनता का शोषण नहीं है?जब हर बार काम के नाम पर खर्च दिखाया जाए, लेकिन स्थिति में ठोस सुधार न हो, तो इसे क्या कहा जाए—लापरवाही या फिर जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़?जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी?सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर काम हो रहा है, तो उसका असर क्यों नहीं दिख रहा, और अगर असर नहीं है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।अब काशीपुर की जनता जवाब चाहती है—क्योंकि विकास के नाम पर अगर सिर्फ दिखावा हो और असली फायदा न पहुंचे, तो यह सिर्फ कमी नहीं, बल्कि जनता के साथ शोषण की तस्वीर बन जाती है।

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संपादक : एफ यू खान

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