काशीपुर। आर्थिक अपराधों पर सख्ती दिखाते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (जू.डि.) की अदालत ने चेक बाउंस के एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपी को तीन माह के साधारण कारावास और 3.25 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत का यह फैसला ऐसे मामलों में स्पष्ट संदेश देता है कि वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी और विश्वासघात को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुंडा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मिस्सरवाला निवासी अब्दुल गफ्फार ने अदालत में परिवाद दायर किया था। उन्होंने बताया कि जिला नैनीताल की तहसील रामनगर के ग्राम शक्तिनगर पूछड़ी निवासी साकिर ने उन्हें एक प्लॉट बेचने का सौदा किया था। बाद में पता चला कि उक्त भूमि का वास्तविक स्वामी कोई अन्य व्यक्ति है।परिवादी के अनुसार, साकिर ने भरोसा दिलाया कि वह वास्तविक मालिक से बैनामा करवा देगा। इस आश्वासन पर अब्दुल गफ्फार ने उसे 16 अप्रैल 2019 को एक लाख रुपये का चेक दिया, जबकि शेष राशि छह माह बाद देने की बात तय हुई। निर्धारित समय के भीतर परिवादी ने आरोपी को 1.52 लाख रुपये और 53 हजार रुपये अतिरिक्त दिए। इस प्रकार आरोपी साकिर कुल 3.05 लाख रुपये ले चुका था।आरोप है कि रकम लेने के बाद भी साकिर ने बैनामा कराने में लगातार टालमटोल शुरू कर दी। बार-बार तकादा करने पर उसने 3.05 लाख रुपये का चेक परिवादी को दिया, लेकिन जब इसे बैंक में प्रस्तुत किया गया तो चेक बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी ने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को विधिक नोटिस भी भेजा, लेकिन आरोपी ने भुगतान करने से इंकार कर दिया।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया। साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध पाए जाने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (जू.डि.) पूनम टोडी ने आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन माह के साधारण कारावास के साथ 3.25 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि चेक बाउंस जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि आर्थिक लेनदेन में पारदर्शिता बनी रहे और आम लोगों का विश्वास सुरक्षित रह सके।यह फैसला न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में वित्तीय अनुशासन और कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक सख्त संदेश माना जा रहा है।
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