काशीपुर। जिला उपभोक्ता आयोग, ने गोल्ड लोन के लिए यूको बैंक की जसपुर शाखा में गिरवी रखे 144-120 ग्राम 24 कैरेट सोने के आभूषण वापस करने का आदेश दिया है। आयोग ने बैंक द्वारा गिरवी रखे आभूषणों की सुरक्षा न करने और ऋण चुकता होने के बाद उन्हें वापस न लौटाने को उपभोक्ता सेवा में कमी माना है। बैंक को आभूषण सुरक्षित स्थिति में वापस करने अथवा ऐसा करने में असमर्थ रहने पर उनकी 30 नवंबर 2020 की बाजार कीमत छह प्रतिशत साधारण ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए गए हैं। जसपुर निवासी शीतल अग्रवाल ने अधिवक्ता नदीम उद्दीन के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था। परिवाद में बताया गया कि उन्होंने व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए यूको बैंक की जसपुर शाखा में अपने सोने के आभूषण गिरवी रखकर 3-22 लाख रुपये का गोल्ड लोन लिया था। ऋण की ब्याज समेत करीब 3-98 लाऽ रुपये की पूरी राशि नवंबर 2020 में चुका दी गई थी।वर्ष 2023 में आभूषणों की आवश्यकता पड़ने पर शीतल अग्रवाल ने बैंक को लिखित प्रार्थना पत्र देकर गिरवी रखे गहने वापस मांगे, लेकिन बैंक ने न तो आभूषण लौटाए और न ही इसका संतोषजनक कारण बताया। इसके बाद अधिवक्ता के माध्यम से बैंक को कानूनी नोटिस भी भेजा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से बताया गया कि 11 जुलाई 2018 को बैंक शाखा में कार्यरत चपरासी दुश्यंत कुमार द्वारा आभूषणों की चोरी की गई थी। बैंक के अनुसार कर्मचारी को निलंबित कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आरोपपत्र दाखिल किया गया था। बैंक ने यह भी कहा कि चोरी की घटना की जानकारी परिवादिनी को फोन पर दी गई थी और समझौते के तहत 4,35,663 रुपये मुआवजा स्वीकार करने संबंधी पत्र डाक से भेजा गया था। बैंक ने सेवा में किसी तरह की कमी से इनकार करते हुए परिवाद खारिज करने की मांग की।जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्य नवीन चंद्र चंदौला और सदस्या डॉ- मनीला ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद बैंक को गिरवी रखे आभूषणों की सुरक्षा और वापसी के लिए जिम्मेदार माना। आयोग ने अपने 7 अगस्त 2026 के निर्णय में आदेश दिया कि निर्णय की तिथि से 45 दिन के भीतर 144-120 ग्राम 24 कैरेट सोने के आभूषण, यदि चोरी के बाद बैंक को प्राप्त हो चुके हैं, तो उन्हें उसी स्थिति में शीतल अग्रवाल को वापस किया जाए। यदि बैंक आभूषण वापस करने में असमर्थ रहता है तो 30 नवंबर 2020 को ऋण समाप्त होने की तिथि पर सोने की बाजार कीमत छह प्रतिशत साधारण ब्याज सहित अदा करनी होगी। इसके अलावा आयोग ने बैंक को 5 हजार रुपये मानसिक क्षति और 2 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने का भी आदेश दिया।
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