देहरादून। प्राकृतिक जलस्रोतों और वर्षा आधारित नदियों के पुनर्जीवन को लेकर राज्य सरकार ने गंभीर पहल की है। स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन प्राधिकरण (सारा) के तहत पौड़ी जिले की दो और नैनीताल जिले की एक नदी की सहायक नदियों व जलसमेट क्षेत्रों में जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज से जुड़े कार्यों के लिए शासन ने 5.19 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अंतर्गत हल्द्वानी, कोटाबाग और रामनगर क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से रिचार्ज शाफ्ट से जुड़े कार्य भी कराए जाएंगे।पौड़ी जिले में पश्चिमी नयार नदी की सहायक नदियों इरगाड, पैडुल, निशनी, स्यूल और रछुली के जल संग्रहण क्षेत्रों में जल संरक्षण और मृदा संरक्षण से संबंधित विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिक समय तक रोककर रखना और प्राकृतिक जलधाराओं को मजबूत करना है। इसके साथ ही इसी जिले की हिंवल नदी के जलसमेट क्षेत्र में पेयजल योजनाओं के जल संवर्द्धन को बढ़ाने के लिए भी अलग-अलग संरचनात्मक और संरक्षणात्मक कार्य प्रस्तावित किए गए हैं।नैनीताल जिले में शिप्रा नदी की सहायक नदियों थुआ, कुलेती, उकिना और कुटियाखाल के जलसमेट क्षेत्रों में भी जल संरक्षण से जुड़े कार्य किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और जलस्रोतों के पुनरोद्धार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि भविष्य में पेयजल संकट को कम किया जा सके।इधर, गंगा सलाण विकास समिति के अध्यक्ष दिनेश भंडारी और महासचिव प्रदीप कुकरेती ने यमकेश्वर क्षेत्र के अंतर्गत हिंवल नदी के जलसमेट क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं के जल संवर्द्धन और नदी पुनरोद्धार कार्यों को स्वीकृति देने पर राज्य सरकार का आभार जताया है। उन्होंने सुझाव दिया कि जलसमेट क्षेत्रों में सभी कार्य वैज्ञानिक आधार पर किए जाएं, ताकि जल संरक्षण के प्रयास लंबे समय तक प्रभावी बने रहें।सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के माध्यम से न केवल सूखते जलस्रोतों और नदियों को पुनर्जीवित किया जा सकेगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता और भूजल स्तर में भी स्थायी सुधार होगा।
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