देहरादून। उत्तराखंड में उद्योगों और इंजीनियरिंग इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति सामने आई है। जानकारी के अनुसार, राज्य में श्रमिकों का वेतन अब पड़ोसी राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों से अधिक हो गया है। इसके बावजूद वेतन वृद्धि और श्रमिक हितों को लेकर असंतोष की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले ही सतर्क कदम उठाए हैं।मामले की शुरुआत ऊधमसिंह नगर से हुई, जहां जिलाधिकारी को श्रमिक संगठनों और विभिन्न एसोसिएशनों की ओर से ज्ञापन सौंपा गया। इसमें मजदूरों के शोषण, न्यूनतम वेतन में वृद्धि की मांग और संभावित श्रमिक असंतोष को लेकर चिंता जताई गई। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों के नियोक्ताओं और कर्मकार प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता की जानकारी भी श्रम विभाग को भेजी गई।जिलाधिकारी ने आशंका व्यक्त की कि यदि समय रहते वेतन में आवश्यक वृद्धि नहीं की गई, तो राज्य में भी अन्य औद्योगिक क्षेत्रों जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस पर श्रमायुक्त पी.सी. दुम्का ने तत्काल संज्ञान लेते हुए शासन को अवगत कराया।शासन स्तर पर यह भी माना गया कि लगभग 20 वर्ष पुरानी अधिसूचना के चलते जीवनयापन की लागत में लगातार वृद्धि के बावजूद श्रमिकों की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है, जिससे असंतोष की स्थिति बनी हुई है।इसी परिप्रेक्ष्य में सरकार ने समय रहते कदम उठाने का निर्णय लिया है, ताकि श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सके और औद्योगिक क्षेत्रों में संतुलन एवं शांति बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो उद्योगों की कार्यप्रणाली और निवेश पर भी इसका असर पड़ सकता है।कुल मिलाकर, सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में सक्रिय नजर आ रही है।
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