देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने वर्षों से वन भूमि पर बसे हजारों परिवारों को बड़ी राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य कैबिनेट ने देहरादून के बापूग्राम, नैनीताल के बिंदुखत्ता और ऊधम सिंह नगर के बग्गा-54 क्षेत्र के नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन तीनों क्षेत्रों में करीब 4,730 हेक्टेयर वन भूमि पर बड़ी संख्या में लोग वर्षों से निवास कर रहे हैं और लंबे समय से इन्हें राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग की जा रही है। सरकार के इस कदम से हजारों परिवारों को स्थायी अधिकार और मूलभूत सुविधाएं मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।इन क्षेत्रों में सबसे अधिक आबादी नैनीताल जिले के लालकुआं के पास स्थित बिंदुखत्ता में निवास करती है। यहां तराई पूर्वी वन प्रभाग की लगभग 3,500 हेक्टेयर वन भूमि पर पिछले कई दशकों से लोग बसे हुए हैं। वर्ष 1970 के दशक से यहां बसावट शुरू हुई थी और वर्तमान में करीब 50 हजार लोग इस क्षेत्र में रह रहे हैं। वर्षों से स्थानीय लोग बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग करते रहे हैं और इस मुद्दे को लेकर कई बार आंदोलन भी किए गए।पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में बिंदुखत्ता को नगर पालिका घोषित किया गया था। नगर पालिका कार्यालय खोला गया और अधिशासी अधिकारी की तैनाती भी हुई, लेकिन इसके बाद नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब राज्य सरकार के नए निर्देशों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बिंदुखत्ता सहित बापूग्राम और बग्गा-54 के नियमितीकरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो हजारों परिवारों को भूमि संबंधी अधिकारों के साथ सड़क, बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।
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