देहरादून। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ और बदलती खानपान आदतों के बीच मोटापा तेजी से गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल शरीर का वजन बढ़ना नहीं, बल्कि एक “साइलेंट किलर” है, जो आगे चलकर मधुमेह, हृदय रोग और अन्य जटिल बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। खास चिंता की बात यह है कि अब बच्चे भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि फास्ट-फूड, पैकेज्ड और अधिक शक्कर व वसा युक्त खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी तथा मोबाइल-टीवी पर अधिक समय बिताना मोटापे के प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक और पौष्टिक घर के भोजन की जगह जंक-फूड का बढ़ता चलन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना जरूरी है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019–21) के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. राकेश ने बताया कि उत्तराखंड में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अधिक वजन या मोटापे की दर 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई है। सबसे अधिक हरिद्वार जनपद में लगभग 7 प्रतिशत की दर दर्ज की गई है, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
मोटापे की बढ़ती समस्या से बचाव के लिए डॉ. राकेश कुमार ने 5-2-1-0 नियम अपनाने की सलाह दी है। इस नियम के तहत प्रतिदिन कम से कम 5 फल और सब्जियों का सेवन, स्क्रीन टाइम 2 घंटे से कम रखना, रोजाना कम से कम 1 घंटा सक्रिय खेल या व्यायाम करना और शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक से पूरी तरह दूरी बनाए रखना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सरल नियम को नियमित जीवनशैली में शामिल किया जाए तो मोटापे पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित करने में अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम होती है। घर में संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देकर मोटापे की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। विश्व मोटापा दिवस जैसे अवसरों का उद्देश्य भी यही है कि समाज में जागरूकता बढ़े और आने वाली पीढ़ी को मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।
साइलेंट महामारी बनता मोटापा: 5-2-1-0 मंत्र से बच्चों और बड़ों को बचाने की सलाहदेहरादून। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ और बदलती खानपान आदतों के बीच मोटापा तेजी से गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल शरीर का वजन बढ़ना नहीं, बल्कि एक “साइलेंट किलर” है, जो आगे चलकर मधुमेह, हृदय रोग और अन्य जटिल बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। खास चिंता की बात यह है कि अब बच्चे भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहे हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि फास्ट-फूड, पैकेज्ड और अधिक शक्कर व वसा युक्त खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी तथा मोबाइल-टीवी पर अधिक समय बिताना मोटापे के प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक और पौष्टिक घर के भोजन की जगह जंक-फूड का बढ़ता चलन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना जरूरी है।राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019–21) के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. राकेश ने बताया कि उत्तराखंड में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अधिक वजन या मोटापे की दर 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई है। सबसे अधिक हरिद्वार जनपद में लगभग 7 प्रतिशत की दर दर्ज की गई है, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।मोटापे की बढ़ती समस्या से बचाव के लिए डॉ. राकेश कुमार ने 5-2-1-0 नियम अपनाने की सलाह दी है। इस नियम के तहत प्रतिदिन कम से कम 5 फल और सब्जियों का सेवन, स्क्रीन टाइम 2 घंटे से कम रखना, रोजाना कम से कम 1 घंटा सक्रिय खेल या व्यायाम करना और शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक से पूरी तरह दूरी बनाए रखना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सरल नियम को नियमित जीवनशैली में शामिल किया जाए तो मोटापे पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित करने में अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम होती है। घर में संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देकर मोटापे की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। विश्व मोटापा दिवस जैसे अवसरों का उद्देश्य भी यही है कि समाज में जागरूकता बढ़े और आने वाली पीढ़ी को मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।












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