देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा लगातार श्रद्धा और आस्था के साथ आगे बढ़ रही है। यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु देवभूमि पहुंच चुके हैं। पिछले 19 दिनों में चारों धामों में कुल 7 लाख 72 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। बड़ी संख्या में देशभर से श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्गों पर लगातार भीड़ बढ़ने के चलते प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर काम कर रही हैं।आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे हैं, जहां अब तक लगभग 3 लाख 45 हजार श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। वहीं बद्रीनाथ धाम में करीब 1 लाख 85 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। यमुनोत्री धाम में लगभग 1 लाख 16 हजार श्रद्धालु पहुंचे, जबकि गंगोत्री धाम में 1 लाख 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन किए। यात्रा मार्गों पर लगातार बढ़ती भीड़ के बीच प्रशासन की ओर से सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं और यात्रा प्रबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं।हालांकि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ यात्रा चुनौतीपूर्ण भी बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 19 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा के दौरान अब तक 29 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य संबंधी कारणों से मौत हो चुकी है। अधिक ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, थकान, हृदय संबंधी समस्याएं और बदलता मौसम कई श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। प्रशासन लगातार यात्रियों से स्वास्थ्य जांच कराने, मौसम की जानकारी लेने और सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।गौरतलब है कि इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। यात्रा शुरू होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचने लगे थे। होटल, धर्मशाला, यातायात सेवाएं और स्थानीय बाजार भी यात्रियों की भीड़ से गुलजार नजर आ रहे हैं।चारधाम यात्रा को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है। मान्यता है कि हिमालय की गोद में बसे इन चार धामों की यात्रा करने से व्यक्ति को आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। परंपरा के अनुसार यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है, इसके बाद गंगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में इस तीर्थ परंपरा को व्यापक रूप से स्थापित किया था। आज भी करोड़ों श्रद्धालु इसे अपनी आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का सबसे बड़ा केंद्र मानते हैं।
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