उत्तरकाशी। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तांबाखाणी सुरंग की दीवार से एक बार फिर पानी की जलधारा फूटने से सुरंग में जलभराव और गंदगी की समस्या बढ़ गई है। सुरंग की दीवार से पानी रिसने की यह घटना तीसरी बार सामने आई है, जिसके बाद इसके निर्माण की गुणवत्ता और लंबे समय से लंबित सुधारीकरण कार्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि सुरंग को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को हस्तांतरित किए करीब आठ माह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इसमें मरम्मत और सुधारीकरण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। बताया गया है कि जिला मुख्यालय से होकर गुजरने वाले गंगोत्री हाईवे पर लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से 370 मीटर लंबी तांबाखाणी सुरंग का निर्माण वर्ष 2013 में पूरा हुआ था, लेकिन निर्माण के बाद से ही सुरंग में पानी के रिसाव की समस्या बनी हुई है। कई वर्षों तक सुरंग की देखरेख की जिम्मेदारी किसी विभाग या एजेंसी को स्पष्ट रूप से तय नहीं होने के कारण इसकी स्थिति उपेक्षित रही। वर्ष 2021 में तत्कालीन जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सुरंग को बीआरओ को हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया शुरू की थी और पिछले वर्ष दिसंबर में इसे बीआरओ के सुपुर्द कर दिया गया था। हालांकि हस्तांतरण के आठ माह बाद भी सुरंग के सुधारीकरण का काम शुरू नहीं हो सका है। मानसून के दौरान हर वर्ष सुरंग की दीवारों से पानी निकलने की समस्या सामने आती है और इस बार भी बांयी दीवार से लगातार जलधारा निकल रही है, जिसके कारण सुरंग के फुटपाथ पर पानी जमा होने के साथ गंदगी भी बढ़ गई है और यहां से गुजरने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले वर्ष 2023 और वर्ष 2025 में भी सुरंग की दीवारों से जलधाराएं फूट चुकी हैं। पिछली घटनाओं के दौरान प्रशासन की ओर से मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन भी किया गया था, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। अब तीसरी बार दीवार से पानी निकलने के बाद सुरंग के निर्माण की गुणवत्ता के साथ-साथ इसके भविष्य को लेकर भी चिंताएं सामने आ रही हैं। बीआरओ की ओर से बताया गया है कि तांबाखाणी सुरंग की मरम्मत के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार किए जाने के संबंध में परिवहन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है और टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से निर्माण कंपनी का चयन किया जाना है, जिसकी प्रक्रिया फिलहाल चल रही है। वहीं, पानी के रिसाव की वास्तविक समस्या को समझने के लिए पहले विशेषज्ञ एजेंसी से अध्ययन कराया जाएगा और अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर ही सुरंग में आवश्यक मरम्मत एवं सुधारीकरण कार्य किए जाएंगे। बीआरओ कमांडर राज किशोर के अनुसार, पानी के रिसाव की समस्या के समाधान से पहले विशेषज्ञ एजेंसी से इसका अध्ययन कराया जाना जरूरी है और अध्ययन के बाद ही मरम्मत संबंधी कार्य आगे बढ़ाए जाएंगे। सुरंग में लगातार सामने आ रही जल रिसाव की समस्या ने जहां राहगीरों की परेशानी बढ़ा दी है, वहीं वर्षों से लंबित सुधारीकरण कार्य को लेकर भी अब प्रभावी और स्थायी समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है।
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